Raebareli Lynching Case: उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के ऊंचाहार थाना क्षेत्र के जमुनापुर गांव में दलित समुदाय के एक युवक की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर देने की हृदयविदारक घटना सामने आई है। मृतक की पहचान 38 वर्षीय हरियोम वाल्मीकि के रूप में हुई है, जिसे 2 अक्टूबर की रात लगभग 1 बजे ग्रामीणों ने चोर समझकर बेरहमी से पीट डाला। इस अमानवीय घटना से पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैल गया है। अब तक क्या हुई कार्रवाई? इस मामले में पुलिस ने अब तक 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें पांच को तुरंत घटना के बाद गिरफ्तार किया गया था, जिनकी पहचान विजय सिंह, वैभव सिंह, विपिन मौर्य, सहदेव पासी और सुरेश कुमार मौर्य के रूप में हुई है। बाकी चार आरोपियों को बाद में गिरफ्तार किया गया। पुलिस का कहना है कि वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर 15 से 20 और लोगों की गिरफ्तारी की तैयारी की जा रही है। लगेगा NSA और गैंगस्टर एक्ट रायबरेली पुलिस मामले में कठोर धाराओं में कार्रवाई कर रही है। एसपी ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर अधिनियम और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत केस दर्ज किया जाएगा। इसके लिए स्पेशल टीम का गठन किया गया है जो वीडियो के आधार पर अन्य आरोपियों की पहचान कर रही है। साथ ही उन लोगों पर भी कार्रवाई की जाएगी जो मौके पर मौजूद थे लेकिन पीड़ित को बचाने का प्रयास नहीं किया और न ही पुलिस को सूचना दी। पुलिसकर्मियों पर भी गिरी गाज घटना के बाद पुलिस की लापरवाही उजागर होने पर प्रशासन ने पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। थानाध्यक्ष को भी हटा दिया गया है, और उनकी जगह एक नए अधिकारी की नियुक्ति की गई है। जातिगत पहचान और भीड़ की भूमिका पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पीड़ित की पहचान और जाति की जानकारी भीड़ को नहीं थी। इसके बावजूद, मृतक की जाति सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। घटना में शामिल आरोपियों में मौर्य, पासी और कुछ सामान्य वर्ग के लोग शामिल थे। इससे साफ होता है कि मामला केवल चोरी के संदेह का नहीं, बल्कि भीड़तंत्र की मानसिकता का खतरनाक रूप है। सामाजिक आक्रोश और प्रशासन का रुख घटना को लेकर दलित संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। वे इस घटना को जातिगत हिंसा मानते हुए दोषियों को फांसी देने की मांग कर रहे हैं। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि इस जघन्य अपराध में किसी को बख्शा नहीं जाएगा और त्वरित न्याय सुनिश्चित किया जाएगा। रायबरेली की यह घटना सिर्फ कानून-व्यवस्था की विफलता नहीं, बल्कि भीड़ के हाथों कानून को ठेंगा दिखाने का जीवंत उदाहरण है। ऐसे मामलों में सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई न सिर्फ पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए जरूरी है, बल्कि समाज में कानून का डर बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है। Read More :RKM Power Plant Accident: सक्ति के RKM पॉवर प्लांट में मरम्मत के दौरान बड़ा हादसा, लिफ्ट गिरने से तीन मजदूरों की मौत, सात से अधिक घायल














