Chief Justice Gavai: सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई ने हाल ही में उन पर जूता फेंकने की कोशिश को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि, “यह घटना अब हमारे लिए एक भूला-बिसरा अध्याय है।” यह टिप्पणी उन्होंने गुरुवार को सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण की ओर से की गई पुरानी घटना के जिक्र पर दी। क्या हुआ था सुप्रीम कोर्ट में? 6 अक्टूबर 2025 को वकील राकेश किशोर ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस गवई की ओर जूता फेंकने की कोशिश की थी। राकेश किशोर खजुराहो मंदिर में भगवान विष्णु की 7 फीट लंबी खंडित मूर्ति को पुनर्स्थापित करने की मांग वाली याचिका पर सीजेआई की टिप्पणी से नाराज़ थे। दरअसल, सीजेआई गवई ने याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा था कि यह विषय भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधिकार क्षेत्र में आता है। साथ ही, उन्होंने याचिकाकर्ता से कहा था कि यदि वे भगवान विष्णु के सच्चे भक्त हैं, तो उन्हें स्वयं भगवान से ही प्रार्थना करनी चाहिए। ‘घटना स्तब्ध करने वाली थी, लेकिन अब भूतकाल की बात है’ – CJI गवई सीजेआई ने कहा “सोमवार को जो हुआ उससे मैं और मेरे साथ बैठे जज स्तब्ध थे, लेकिन अब हमारे लिए यह भूला हुआ अध्याय है। हम आगे बढ़ चुके हैं।”यह वक्तव्य एक उदाहरण है कि सर्वोच्च न्यायालय के शीर्ष पद पर बैठा व्यक्ति किस तरह की संयमता और धैर्य का प्रदर्शन करता है। बेंच के दूसरे जज उज्जल भुईंया ने जताई असहमति हालांकि, बेंच के दूसरे सदस्य जस्टिस उज्जल भुईंया ने इस घटना को “सुप्रीम कोर्ट का अपमान” करार दिया। उन्होंने कहा, “मैं इसे नहीं भूल सकता। यह कोई मजाक नहीं है। वह देश के मुख्य न्यायाधीश हैं और उन पर हमला सिर्फ व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरे संस्थान पर हमला है।”उन्होंने यह भी कहा कि वह किसी को माफ नहीं कर सकते, क्योंकि इस तरह की हरकतें न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की प्रतिक्रिया सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने घटना की निंदा करते हुए कहा “यह पूरी तरह अक्षम्य अपराध था, लेकिन जिस प्रकार कोर्ट और पीठ ने संयम और सहनशीलता दिखाई, वह अत्यंत प्रेरणादायक है।”उन्होंने कोर्ट की गरिमा को बनाए रखने के लिए चीफ जस्टिस और अन्य जजों की प्रशंसा की। सुप्रीम कोर्ट जैसी सर्वोच्च संस्था में ऐसी घटनाएं न केवल न्याय प्रणाली की गरिमा पर सवाल उठाती हैं, बल्कि समाज में बढ़ती असहिष्णुता को भी उजागर करती हैं। हालांकि, चीफ जस्टिस गवई का संयम और “भूल जाने” वाला दृष्टिकोण भारत की न्यायिक प्रणाली की परिपक्वता को दर्शाता है। वहीं, जस्टिस भुईंया और अन्य न्यायिक अधिकारियों की कड़ी प्रतिक्रियाएं यह संकेत देती हैं कि संस्थान की गरिमा की रक्षा सर्वोपरि है। Read More : Trump Administration Tariff: ट्रंप प्रशासन ने जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ लगाने की योजना टाली: भारतीय फार्मा उद्योग को बड़ी राहत














