Rahul Gandhi Nobel Prize Controversy: वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए नोबेल शांति पुरस्कार मिलने के बाद भारत में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इसी कड़ी में कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने राहुल गांधी की तुलना मचाडो से करते हुए मांग की है कि उन्हें भी शांति का नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए। कांग्रेस नेता ने की नोबेल की मांग कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने सोशल मीडिया X पर एक पोस्ट शेयर करते हुए मचाडो और राहुल गांधी की तस्वीर एक साथ लगाई और लिखा:“इस बार शांति का नोबेल पुरस्कार वेनेजुएला के विपक्षी नेता को संविधान की रक्षा के लिए दिया गया है। भारत के विपक्षी नेता राहुल गांधी भी देश के संविधान को बचाने की लड़ाई का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्हें भी यह सम्मान मिलना चाहिए।”यह बयान आते ही सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में गर्मागरमी बढ़ गई। बीजेपी का तंज: 99 बार चुनाव हारने के बाद मिलेगा नोबेल कांग्रेस के इस बयान पर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने X पर लिखा:“कांग्रेस अब राहुल बाबा के लिए नोबेल पुरस्कार मांग रही है! जरूर दिया जाना चाहिए — 99 बार चुनाव हारने के बाद। साथ ही झूठ बोलने, पाखंड करने और 1975 की इमरजेंसी व 1984 के दंगे जैसे लोकतंत्र के हनन के लिए भी पुरस्कार मिलना चाहिए।” बीजेपी ने यह भी कहा कि राहुल गांधी का इतिहास केवल राजनीतिक ड्रामेबाज़ी तक सीमित है और कांग्रेस उनके ज़रिए संविधान की आड़ में सत्ता की राजनीति कर रही है। कांग्रेस का तर्क: लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं, संविधान और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वे बीजेपी सरकार पर आरोप लगाते रहे हैं कि: चुनावों में धांधली, वोटरों के नाम हटाना ईवीएम हैकिंग और मतदाता सूचियों में हेराफेरी आवाज़ उठाने वालों पर कार्रवाई आरक्षण और सामाजिक न्याय पर हमले अल्पसंख्यकों और कमजोर वर्गों के अधिकारों में कटौती इन मुद्दों को राहुल गांधी ने बार-बार संसद और जनता के बीच उठाया है, जिसे कांग्रेस “तानाशाही के खिलाफ लोकतांत्रिक लड़ाई” बताती है। इंडिया गठबंधन की रणनीति राहुल गांधी इस समय ‘इंडिया गठबंधन’ के प्रमुख चेहरों में से एक हैं, जिसका मकसद 2024 के लोकसभा चुनावों में एनडीए को चुनौती देना है। विपक्ष का दावा है कि मौजूदा सरकार अलोकतांत्रिक तरीकों से सत्ता में बनी हुई है और जनता के बुनियादी मुद्दों को नजरअंदाज कर रही है।मारिया मचाडो को नोबेल पुरस्कार मिलने के बाद राहुल गांधी की तुलना किए जाने पर राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है। कांग्रेस जहां उन्हें संविधान और लोकतंत्र का रक्षक बता रही है, वहीं बीजेपी इसे राजनीतिक नौटंकी कहकर खारिज कर रही है। यह बयानबाज़ी एक बार फिर दिखाती है कि भारत में चुनाव से पहले राजनीतिक विमर्श कितनी जल्दी भावनात्मक और वैचारिक टकराव का रूप ले लेता है, और कैसे अंतरराष्ट्रीय घटनाओं को भी घरेलू राजनीति में इस्तेमाल किया जाता है। Read More : Pawan Singh News : पवन सिंह का सियासी यू-टर्न, नहीं लड़ेंगे बिहार का चुनाव














