Mainpur Panchayat Order: मैनपुर खुर्द ग्राम पंचायत के सचिव बेनूराम पांडे द्वारा जारी एक विवादित आदेश ने इलाके में खलबली मचा दी है। सचिव ने निर्देश जारी किया है कि जो ग्रामीण पंचायत का कोई भी टैक्स—जैसे जलकर, प्रकाश कर, संपत्ति कर या धंधा कर—नहीं भरेंगे, उन्हें राशन की दुकान से राशन नहीं दिया जाएगा। इस तुगलकी फरमान के बाद ग्रामीण हैरान और आक्रोशित हैं, उनका कहना है कि यदि उन्हें राशन नहीं मिला तो उनके “खाने के लाले पड़ जाएंगे।”

सचिव का आदेश: टैक्स न भरने वालों को राशन की रोक
मैनपुर पंचायत सचिव बेनूराम पांडे ने मैनपुर सोसायटी के सेल्समैन को पत्र जारी कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बिना ग्राम पंचायत का टैक्स जमा किए किसी भी हितग्राही को राशन नहीं दिया जाएगा। आदेश में कहा गया है कि जल कर, प्रकाश कर, संपत्ति कर, धंधा कर समेत सभी करों का भुगतान करने के बाद ही राशन वितरण संभव होगा। सचिव ने इस कदम को पंचायत की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए जरूरी बताया है।

ग्रामीणों में मचा आक्रोश
सचिव के इस आदेश के खिलाफ ग्रामवासियों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत गरीब और जरूरतमंदों को राशन उपलब्ध कराना सरकार का संवैधानिक कर्तव्य है। “टैक्स न भरने पर राशन रोकना गरीबों के अधिकारों का हनन है,” ग्रामीणों ने एकजुट होकर बताया। उनका कहना है कि राशन के बिना जीवन चलाना मुश्किल है और अगर राशन नहीं मिलेगा तो भूखमरी जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
विपक्ष और सामाजिक संगठनों का भी विरोध
इस आदेश पर स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता और विपक्षी दलों ने भी कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि ग्रामीण जनता की समस्याओं को समझते हुए सरकार को इस प्रकार के कठोर कदम से बचना चाहिए। एक कार्यकर्ता ने कहा, “राशन वितरण गरीबों का जीवनदायिनी सुविधा है, इसे राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए।”
सरकार और अधिकारियों की भूमिका
खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत लाभार्थियों को राशन वितरण पर रोक लगाना गैरकानूनी माना जाता है। इस आदेश के प्रकाश में प्रशासनिक अधिकारियों से इस मामले में उचित कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है। दूसरी ओर, पंचायत सचिव का कहना है कि वे पंचायत के विकास और सेवा कार्यों के लिए टैक्स संग्रह बढ़ाना चाहते हैं, लेकिन ग्रामीणों की आपत्तियों को भी वे गंभीरता से लेंगे
मैनपुर पंचायत सचिव का यह आदेश ग्रामीणों के मूलभूत अधिकारों के खिलाफ माना जा रहा है। ऐसे आदेश से न केवल पंचायत प्रशासन की छवि प्रभावित हो रही है, बल्कि ग्रामीणों में असंतोष भी बढ़ रहा है। जरूरत है कि पंचायत प्रशासन इस आदेश पर पुनर्विचार करे और ग्रामीणों के हितों को प्राथमिकता देते हुए समाधान निकाले। साथ ही, सरकार को भी खाद्य सुरक्षा अधिनियम के नियमों का पालन सुनिश्चित कराना होगा ताकि किसी भी गरीब को राशन से वंचित न किया जाए।











