Artificial Intelligence: जैसे-जैसे दुनिया डिजिटल होती जा रही है, वैसे-वैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का दायरा भी तेजी से बढ़ता जा रहा है। यह तकनीक जहां एक ओर व्यापार और सेवाओं को तेज, सटीक और कुशल बना रही है, वहीं दूसरी ओर नौकरियों पर बड़ा खतरा भी बनकर उभर रही है। अब विश्व बैंक ने अपनी ताजा रिपोर्ट में दक्षिण एशिया के देशों के लिए चिंता जताई है।

7% नौकरियां होंगी प्रभावित
‘साउथ एशिया डेवलपमेंट अपडेट: जॉब्स, AI एंड ट्रेड’ शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, मालदीव और श्रीलंका जैसे देशों में करीब 7% नौकरियां AI के कारण खतरे में पड़ सकती हैं। खासतौर पर मध्यम शिक्षा स्तर और युवा कर्मचारियों की नौकरियां सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी।

AI से किसे होगा सबसे ज्यादा नुकसान?
रिपोर्ट के अनुसार, AI का असर खासतौर पर उन क्षेत्रों पर पड़ेगा जहां डेटा प्रोसेसिंग, अकाउंटिंग, ग्राहक सेवा जैसी दोहराई जाने वाली प्रक्रियाएं होती हैं। ये ऐसे क्षेत्र हैं जहां मशीनें इंसानों की जगह काम करना शुरू कर रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि
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कस्टमर केयर,
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डाटा एंट्री,
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फाइनेंस
जैसी नौकरियों पर सीधा असर पड़ेगा।
AI के इस्तेमाल से कंपनियां अपने कामकाज को कम लागत और अधिक दक्षता के साथ पूरा करना चाहेंगी, जिससे मानव संसाधनों की मांग घटेगी।
गरीब बनाम अमीर: किसे ज्यादा नुकसान?
रिपोर्ट में चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई है कि उच्च आय वर्ग के पेशेवर, जो ज्यादा कुशल माने जाते हैं, ज्यादा जोखिम में हैं, क्योंकि उनका काम डिजिटल और तकनीक-आधारित होता है। इसके मुकाबले कम आय वर्ग के वे कामगार जो मैदानी या शारीरिक कार्य करते हैं, फिलहाल थोड़े सुरक्षित हैं।हालांकि, यह भी कहा गया है कि अनुभवी और वरिष्ठ कर्मचारियों की नौकरियों पर कम असर पड़ेगा, क्योंकि AI के लिए निर्णय लेने या रणनीतिक सोच जैसी क्षमताएं अभी पूरी तरह से संभव नहीं हैं।
AI अब सृजनात्मकता को भी चुनौती दे रहा है
AI अब सिर्फ सवालों के जवाब या जानकारी देने तक सीमित नहीं रहा। यह
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निबंध लिख रहा है,
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कविताएं बना रहा है,
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फिल्म की स्क्रिप्ट तैयार कर रहा है,
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डिजिटल आर्ट बना रहा है।
पहले माना जाता था कि AI कभी इंसानी रचनात्मकता की बराबरी नहीं कर सकेगा, लेकिन अब वह भी मुमकिन होता दिख रहा है।विश्व बैंक की रिपोर्ट ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि AI एक दोधारी तलवार है। जहां यह प्रगति का रास्ता खोलती है, वहीं बेरोजगारी का खतरा भी बढ़ा रही है। भारत और दक्षिण एशिया के देशों को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि वे AI की दौड़ में पीछे न छूटें, लेकिन साथ ही अपने मानव संसाधनों को नई तकनीकों के अनुकूल भी बनाएं।











