Madagascar Hydro Crisis: मेडागास्कर, अफ्रीका के पूर्वी तट पर स्थित यह द्वीपीय देश, इन दिनों Gen-Z के नेतृत्व में सरकार विरोधी प्रदर्शन की आग में जल रहा है। 25 सितंबर 2025 को शुरू हुए इन प्रदर्शनों ने अब उग्र रूप ले लिया है। हालात इतने बिगड़ गए कि राष्ट्रपति एंड्री राजोएलिना को न सिर्फ अपनी सरकार बर्खास्त करनी पड़ी, बल्कि अंततः उन्हें देश छोड़कर भागना पड़ा।

क्यों भड़का विद्रोह?
प्रदर्शन की शुरुआत पानी और बिजली की भारी किल्लत को लेकर हुई थी। देशभर में युवा वर्ग, खासकर Gen-Z, इन बुनियादी सुविधाओं की कमी के खिलाफ सड़कों पर उतर आया। लेकिन सरकार की चुप्पी और असंवेदनशीलता ने इस विरोध को आंदोलन का रूप दे दिया।

सेना बन गई निर्णायक मोड़
राष्ट्रपति राजोएलिना ने प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए सुरक्षा बलों को आदेश दिया, लेकिन मामला तब पलटा जब सेना की एक प्रमुख यूनिट CAPSAT ने गोली चलाने से इनकार कर दिया। इसके बाद सेना के कुछ हिस्से भी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में उतर आए, जिससे सरकार की पकड़ और कमजोर हो गई।
झड़पों में गई 22 लोगों की जान
राजधानी एंटानानारिवो समेत कई शहरों में सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुईं, जिनमें कम से कम 22 लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों घायल हुए। हालात बेकाबू होते देख राष्ट्रपति राजोएलिना ने सरकार बर्खास्त कर दी, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
राष्ट्रपति को फ्रांस ने निकाला सुरक्षित
फ्रांसीसी मीडिया और रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के विशेष हस्तक्षेप के बाद 12 अक्टूबर 2025 को फ्रांसीसी सैन्य विमान के ज़रिए एंड्री राजोएलिना को सुरक्षित देश से बाहर निकाला गया।
यह उल्लेखनीय है कि राजोएलिना ने 2009 में सेना के समर्थन से सत्ता में प्रवेश किया था और 2018 में दोबारा राष्ट्रपति बने थे।
विपक्ष और युवाओं की निर्णायक भूमिका
मेडागास्कर के विपक्षी नेताओं का कहना है कि Gen-Z की अगुवाई में चल रहे आंदोलन ने सत्ता को पूरी तरह हिला दिया। युवा पीढ़ी सिर्फ बुनियादी सुविधाओं की मांग नहीं कर रही, बल्कि पारदर्शी और जवाबदेह शासन की भी मांग कर रही है। यह संकेत है कि देश में राजनीतिक बदलाव की लहर चल पड़ी है।मेडागास्कर में चल रहा यह विद्रोह सिर्फ एक आंदोलन नहीं, बल्कि नई पीढ़ी की चेतना और बदलाव की मांग का प्रतीक है। राष्ट्रपति एंड्री राजोएलिना का देश छोड़ना यह दर्शाता है कि जब जनता, विशेषकर युवा, संगठित होकर खड़ी होती है, तो सबसे मजबूत सत्ता भी हिल सकती है।
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