Oslo Embassy Closure: वेनेजुएला ने अचानक नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में स्थित अपना दूतावास बंद कर दिया है। यह कदम उस समय सामने आया है जब विपक्षी नेता मारिया कोरीना माचाडो को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। नॉर्वे के विदेश मंत्रालय ने इसकी पुष्टि की है लेकिन वेनेजुएला ने इसके पीछे कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है।

नॉर्वे की विदेश मंत्रालय प्रवक्ता सेसिली रोआंग ने कहा, “हमें सूचित किया गया है कि वेनेजुएला का दूतावास अपने दरवाजे बंद कर रहा है। यह खेदजनक है। हालांकि हमारे मतभेद हैं, फिर भी नॉर्वे वेनेजुएला के साथ संवाद बनाए रखने की दिशा में काम करता रहेगा।”

माचाडो को नोबेल, वेनेजुएला में राजनीतिक भूचाल
गौरतलब है कि हाल ही में विपक्षी नेता मारिया कोरीना माचाडो को “लोकतांत्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने” और “तानाशाही से लोकतंत्र की ओर शांतिपूर्ण परिवर्तन” की उनकी कोशिशों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।माचाडो को 2024 के राष्ट्रपति चुनाव लड़ने से रोक दिया गया था। इस चुनाव में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने विपक्ष के विरोध के बावजूद खुद को विजेता घोषित कर दिया था।
मादुरो की तीखी प्रतिक्रिया
पुरस्कार के बाद मादुरो ने भले ही सीधे नोबेल का ज़िक्र न किया हो, लेकिन माचाडो पर हमला बोलते हुए उन्हें “दुष्ट चुड़ैल” कह दिया — एक अपमानजनक शब्द जो सरकार द्वारा अक्सर प्रयोग किया जाता है।मादुरो ने कहा, “हम शांति चाहते हैं, और शांति हम लेकर आएंगे, लेकिन यह शांति स्वतंत्रता और संप्रभुता के साथ होगी।”
अमेरिका और ट्रंप को मिला समर्थन
मारिया माचाडो अमेरिका की सैन्य नीतियों और ट्रंप के नेतृत्व को खुला समर्थन देती हैं। उन्होंने नोबेल पुरस्कार “पीड़ित वेनेजुएलाई जनता” और डोनाल्ड ट्रंप को समर्पित किया।एक टीवी इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि “ट्रंप इस पुरस्कार के हकदार हैं क्योंकि उन्होंने कुछ ही महीनों में आठ युद्धों को समाप्त करने में भूमिका निभाई और वेनेजुएला को आज़ादी के दरवाज़े तक पहुंचाया।”
ओस्लो में अचानक चुप्पी
नॉर्वेजियन अखबार Verdens Gang के अनुसार, सोमवार दोपहर से दूतावास के फोन जवाब देना बंद कर चुके थे और शाम तक सभी नंबर भी बंद हो गए थे।वेनेजुएला का यह कदम न केवल कूटनीतिक स्तर पर तनाव को दर्शाता है, बल्कि यह संकेत भी देता है कि माचाडो को मिला नोबेल पुरस्कार अंतरराष्ट्रीय मंच पर वेनेजुएला सरकार को असहज कर रहा है।यह घटना दर्शाती है कि लोकतंत्र की लड़ाई सिर्फ देश के भीतर नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी प्रभाव डाल रही है।











