Trump on China: अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनातनी एक बार फिर गरमा गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप का कहना है कि चीन जानबूझकर अमेरिका से सोयाबीन की खरीद बंद कर अर्जेंटीना से खरीदारी कर रहा है, जिससे अमेरिका और अर्जेंटीना के बीच दरार पैदा हो।

ट्रंप ने यह बयान अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा, “चीन को दरार डालकर फायदा उठाना पसंद है, लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे।” ट्रंप ने कहा कि चीन का व्यवहार उसके स्वभाव के अनुसार है — वह खुद को बड़ा दिखाने और दूसरों को कमजोर करने के लिए कोई भी रणनीति अपना सकता है।

सोयाबीन विवाद से बढ़ा तनाव
ट्रंप ने आरोप लगाया कि चीन, अमेरिका के किसानों को निशाना बना रहा है। “चीन जानबूझकर अमेरिका से सोयाबीन नहीं खरीद रहा, जिससे हमारे किसानों की कमर टूट रही है,” उन्होंने कहा। इसके जवाब में, ट्रंप प्रशासन चीन से कुकिंग ऑयल और अन्य उत्पादों के आयात पर रोक लगाने पर विचार कर रहा है।
बंदरगाह शुल्क बना नया विवाद
इस तनाव को और बढ़ावा मिला जब चीन ने 14 अक्टूबर 2025 से अमेरिकी जहाजों पर नया बंदरगाह शुल्क लागू कर दिया। अब हर अमेरिकी जहाज को 400 युआन (लगभग 56 अमेरिकी डॉलर) प्रति शुद्ध टन शुल्क देना होगा। यह शुल्क अगले तीन वर्षों तक सालाना बढ़ेगा। चीन का कहना है कि यह फैसला देश की शिपिंग इंडस्ट्री और उद्यमियों के हितों की रक्षा के लिए लिया गया है।
यह कदम अमेरिका द्वारा पहले लगाए गए 100% टैरिफ और अन्य आर्थिक प्रतिबंधों की प्रतिक्रिया माना जा रहा है। अमेरिका-चीन व्यापारिक संबंधों में यह नया मोड़ हालात को और बिगाड़ सकता है।
रेयर अर्थ एलिमेंट्स पर भी तनाव
इसके अलावा, रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REEs) पर चीन के नियंत्रण ने अमेरिका की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका ने इन पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक सप्लाई चेन विकसित करने की योजना शुरू की है। इसके जवाब में चीन ने अमेरिका को REEs की आपूर्ति सीमित करने के संकेत दिए हैं।डोनाल्ड ट्रंप का चीन के खिलाफ आक्रामक रुख, विशेष रूप से अर्जेंटीना को लेकर दिए गए बयान, यह संकेत देते हैं कि आने वाले दिनों में अमेरिका-चीन के बीच व्यापार युद्ध और तेज हो सकता है। चीन की ‘फूट डालो और राज करो’ की रणनीति पर ट्रंप की प्रतिक्रिया और संभावित प्रतिबंध, वैश्विक व्यापारिक माहौल को अस्थिर कर सकते हैं। अब यह देखना होगा कि अर्जेंटीना इस भू-राजनीतिक खिंचतान में क्या रुख अपनाता है।
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