CG Weather: छत्तीसगढ़ में इस बार मानसून ने तय समय से पहले दस्तक दी और तय समय से देर तक ठहर कर रिकॉर्डतोड़ बारिश की सौगात दी। मौसम विज्ञान केंद्र रायपुर के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून 14 अक्टूबर को प्रदेश से पूरी तरह विदा हो गया। करीब 110 दिनों तक रुकने के बाद मानसून ने शानदार विदाई ली, और अब प्रदेश में दिन में हल्की गर्मी तथा रात में ठंड बढ़ने के आसार हैं।

सामान्य से अधिक बारिश
1 जून से 14 अक्टूबर तक की मौसम विभाग की रिपोर्ट बताती है कि प्रदेश में औसतन 1244.4 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो कि सामान्य (1142.2 मिमी) से 102.2 मिमी अधिक है। यानी इस बार छत्तीसगढ़ में 9% ज्यादा बारिश हुई। राज्य के अधिकांश जिलों में बारिश का सीजनल कोटा पूरा हुआ और कई क्षेत्रों में यह आंकड़ा पार भी कर गया। नदी-नालों, तालाबों और जलाशयों का जलस्तर सामान्य से ऊपर बना हुआ है।

जल्दी आई और देर से गई मानसून
इस बार मानसून ने 28 मई को बस्तर क्षेत्र में दस्तक दी, जो कि सामान्य से 13 दिन पहले है। मात्र 17 दिनों के भीतर, 14 जून तक, मानसून पूरे छत्तीसगढ़ में सक्रिय हो गया था। जून और जुलाई में भारी बारिश हुई, जिससे खेती-किसानी को बड़ी राहत मिली। वहीं विदाई भी सामान्य से देर से हुई। अमूमन सितंबर के अंत तक मानसून लौटने लगता है, लेकिन इस बार यह 14 अक्टूबर तक सक्रिय रहा। 12 से 14 अक्टूबर के बीच अनुकूल परिस्थितियों के चलते यह एक ही दिन में प्रदेश से पूरी तरह विदा हो गया।
अब कैसा रहेगा मौसम?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अब प्रदेश में शुष्क मौसम बना रहेगा। दिन में हल्की गर्मी का अहसास होगा, जबकि रात के तापमान में धीरे-धीरे गिरावट आने लगेगी। अक्टूबर के अंत तक रातों में ठंडक बढ़ेगी और सुबह-शाम हल्की ठिठुरन महसूस की जा सकेगी।
मंगलवार को रायपुर में अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 23 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। बिलासपुर, दुर्ग और राजनांदगांव में भी तापमान सामान्य के आसपास रहा। हालांकि, कोंटा, बचेली और कुआकोंडा जैसे दक्षिणी अंचलों में हल्की बारिश दर्ज की गई।
खेती और आमजन पर असर
मानसून की लंबी अवधि और भरपूर बारिश से धान की फसल को फायदा हुआ है। खेतों में नमी बनी रहने से अब रबी फसलों की बुवाई की तैयारी भी बेहतर ढंग से की जा सकेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोतों का स्तर बढ़ा है, जिससे आगामी महीनों में जल संकट की आशंका कम हो गई है।मानसून अब भले ही विदा हो गया हो, लेकिन इसने छत्तीसगढ़ को भरपूर पानी देकर किसानों और आम जनता को राहत दी है। आने वाले दिनों में तापमान में बदलाव के साथ शरद ऋतु का असर बढ़ेगा।
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