Jaisalmer Bus Fire : राजस्थान के जैसलमेर में हुए भीषण बस हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। दीपावली की छुट्टियों की खुशी लेकर अपने घर लौट रहे लोगों के लिए ये सफर जिंदगी की आखिरी यात्रा बन गया। हादसे में जोधपुर के डेचू गांव निवासी महेंद्र मेघवाल का पूरा परिवार जलकर खाक हो गया — पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा। इस हृदयविदारक दुर्घटना में कुल 20 लोगों की जान चली गई, जिनमें से कई की पहचान तक नहीं हो पा रही है।

दिवाली की तैयारी अधूरी रह गई
35 वर्षीय महेंद्र मेघवाल, जैसलमेर के आर्मी डिपो में तैनात थे। वे दीपावली मनाने के लिए पत्नी पार्वती, बेटियों खुशबू और दीक्षा, और बेटे शौर्य के साथ घर लौट रहे थे। घर पर उनकी बुजुर्ग मां अपने पोते-पोतियों की राह देख रही थीं। पर उन्हें क्या पता था कि जिस बेटे और उसके परिवार का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं, वो लौट कर कभी नहीं आएंगे।

आग ने सबकुछ लील लिया
हादसा इतना भयानक था कि बस धू-धू कर जल उठी। चश्मदीदों के मुताबिक, कुछ ही मिनटों में बस आग का गोला बन गई। कई यात्रियों की जलकर दर्दनाक मौत हो गई, और कुछ इस कदर झुलस गए कि पहचान मुश्किल हो गई। पुलिस अब डीएनए सैंपल के जरिए शवों की शिनाख्त करने की कोशिश कर रही है।
एक मां का इंतजार कभी खत्म नहीं होगा
डेचू गांव की गलियों में मौन पसरा है। महेंद्र की मां, जिनकी आंखें अब पथरा सी गई हैं, शायद कभी समझ नहीं पाएंगी कि उनके बेटे, बहू और तीनों बच्चों को एक ही दिन में मौत ने क्यों छीन लिया। बेटे के आने की आस में पल-पल गिनने वाली यह मां अब शव की पहचान के लिए डीएनए रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
शोक में डूबा गांव, टूटा परिवार
महेंद्र की पत्नी के भाई और अन्य रिश्तेदार शव गृह में मौजूद हैं। हर किसी की आंखें नम हैं, जुबान पर शब्द नहीं हैं। जो परिवार दीपावली की तैयारी में जुटा था, वहां अब दीये की जगह चिताएं जल रही हैं।
सरकारी मदद और जांच
पुलिस प्रशासन ने हादसे की जांच शुरू कर दी है। प्राथमिक जानकारी के अनुसार, बस और ट्रक की टक्कर के बाद आग लगी, लेकिन तकनीकी कारणों की पुष्टि के लिए फॉरेंसिक टीम जांच में जुटी है। मृतकों के परिवारों को सरकारी सहायता देने की घोषणा की गई है।जैसलमेर का यह बस हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, कई परिवारों की खुशियों का अंत है। महेंद्र मेघवाल और उनके मासूम बच्चों की मौत सिर्फ एक खबर नहीं, हमारी व्यवस्था और सुरक्षा मानकों पर एक सवाल है। दीपावली जैसे उजाले के पर्व को मातम में बदल देने वाली यह घटना कभी न भूलने वाला जख्म बन गई है।
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