Bhupati Surrender: देश के मोस्ट वांटेड नक्सलियों में से एक, 69 वर्षीय मल्लोजुला वेणुगोपाल उर्फ सोनू दादा उर्फ भूपति, ने महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में अपने 60 साथियों के साथ औपचारिक आत्मसमर्पण कर दिया। 6 करोड़ से अधिक के इनामी इस नक्सली के सरेंडर को माओवादी आंदोलन के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आत्मसमर्पण माना जा रहा है।

भूपति पिछले चार दशकों से नक्सली संगठन का प्रमुख चेहरा रहा है और पोलित ब्यूरो का सक्रिय सदस्य था। उसका संबंध तेलंगाना के पेद्दापल्ली जिले से है और वह बी.कॉम डिग्रीधारी है। छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में हुए कई बड़े हमलों और साजिशों का मास्टरमाइंड रह चुका है। सुरक्षा एजेंसियों ने उसके कब्जे से 50 से अधिक आधुनिक हथियार बरामद किए हैं।

आत्मसमर्पण से पहले नक्सल संगठन में मची हलचल
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भूपति ने कुछ समय पहले ही सरकार के समक्ष आत्मसमर्पण की इच्छा जाहिर की थी, जिसके बाद नक्सली संगठन में भारी उथल-पुथल मच गई। आंतरिक फूट के चलते कई अन्य नक्सलियों ने भी आत्मसमर्पण करने का संकेत दिया। इस घटनाक्रम को नक्सलवाद के पतन की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।
महाराष्ट्र सरकार की पुनर्वास योजना
राज्य सरकार की ओर से इन आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए पुनर्वास योजनाओं की घोषणा भी की गई है। आत्मसमर्पण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि, “यह कदम न केवल गढ़चिरौली बल्कि पूरे महाराष्ट्र के लिए शांति और विकास की दिशा में ऐतिहासिक मोड़ है।”
केंद्र सरकार का लक्ष्य: मार्च 2026 तक नक्सलवाद का समापन
गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने की घोषणा कर चुके हैं। इसके तहत एंटी नक्सल ऑपरेशंस तेज किए गए हैं और छत्तीसगढ़, झारखंड व महाराष्ट्र में पुनर्वास नीति को मजबूती से लागू किया जा रहा है।भूपति जैसे शीर्ष नक्सली नेता का आत्मसमर्पण, नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति बहाली और विकास कार्यों को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित हो सकता है। गढ़चिरौली में यह घटनाक्रम एक नई शुरुआत का संकेत है, जहां बंदूकें अब किताबों और कलमों से बदली जा रही हैं।











