Pakistan Army Chief Militancy : जब अपना खुद का घर उग्रवादी हिंसा की भीषण आग में धधक रहा हो, तो दुनिया के सामने शांतिदूत का मुखौटा पहनना भला कहां की समझदारी है? यह कड़वी बात इस समय पड़ोसी देश पाकिस्तान और वहां के नीति-नियंताओं पर बिल्कुल सटीक बैठती है। पाकिस्तानी सेना के प्रमुख, जनरल आसिम मुनीर इन दिनों दुनिया भर के देशों का दौरा करके इस्लामाबाद की अंतरराष्ट्रीय छवि को बदलने की नाकाम कोशिशों में जुटे हैं। वह वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान को ‘जिहादी आतंकवाद फैलाने वाले’ देश के कलंक से मुक्त कराकर एक ‘शांतिदूत’ के रूप में पेश करना चाहते हैं। हालांकि, इसके उलट उनके अपने ही देश के कई महत्वपूर्ण हिस्से इस समय गृहयुद्ध और उग्रवादी ताकतों के हिंसक हमलों से बुरी तरह झुलस रहे हैं, जो उनकी खोखली कूटनीति को उजागर करता है। बीजिंग में मुनीर की कूटनीति पर बड़ा हमला जनरल आसिम मुनीर जब बीते 25 मार्च को बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय रणनीतिक वार्ता में व्यस्त थे, ठीक उसी समय बलूच अलगाववादियों ने उनके दावों की हवा निकाल दी। उग्रवादियों ने पाकिस्तान के सुरक्षा बलों को ले जा रही एक पूरी ट्रेन को शक्तिशाली बम धमाके से उड़ा दिया। इस भीषण और दर्दनाक हमले में 47 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दर्जनों अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ‘बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी’ (BLA) ने जान-बूझकर इस समय को चुना ताकि अंतरराष्ट्रीय मंच पर जनरल मुनीर और पाकिस्तानी हुकूमत को शर्मिंदा किया जा सके। आंकड़ों के मुताबिक, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में बलूच विद्रोह पिछले एक दशक के अपने सबसे खतरनाक और उच्चतम स्तर पर पहुंच चुका है। उग्रवादी हमलों के डरावने आंकड़े इस्लामाबाद स्थित प्रतिष्ठित थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर रिसर्च एंड सिक्योरिटी स्टडीज’ (CRSS) के चौंकाने वाले आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 के दौरान पाकिस्तान में कुल 1,272 उग्रवादी हमले दर्ज किए गए, जिनमें 3,400 से अधिक लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। वहीं, ‘साउथ एशिया टेररिज्म पोर्टल’ (SATP) के नए डेटा बताते हैं कि साल 2026 के शुरुआती 5 महीनों में ही मरने वालों की यह संख्या 1,700 के पार जा चुकी है। इस हिंसा में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है; ड्यूटी के दौरान शहीद होने वाले जवानों की संख्या साल 2019 में 195 थी, जो 2025 में बढ़कर 650 के पार पहुंच गई। CPEC प्रोजेक्ट्स पर संकट के बादल पाकिस्तान की पूरी सेना का मुख्य फोकस इस समय बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) को कुचलने पर है, क्योंकि यह संगठन ‘चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे’ (CPEC) के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है। पाकिस्तान की ‘नेशनल काउंटर टेररिज्म अथॉरिटी’ (NACTA) के अनुसार, बलूच विद्रोहियों ने पिछले कुछ सालों में CPEC प्रोजेक्ट्स को निशाना बनाकर लगभग 20 चीनी नागरिकों की बेरहमी से हत्या कर दी है। BLA का तर्क है कि चीन और इस्लामाबाद के शासक मिलकर बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों का अवैध दोहन कर रहे हैं, जिसका लाभ स्थानीय बलूच आबादी को मिलने के बजाय केवल पंजाब और सिंध के रईसों को मिल रहा है। इस उग्रवाद को दबाने के लिए सेना ने कई सैन्य अभियान चलाए, लेकिन उन्हें सफलता मिलने के बजाय उन पर मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन और जबरन गायब करने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। खैबर पख्तूनख्वा में TTP का आतंक पाकिस्तानी सेना के लिए सबसे बड़ा और सिरदर्द पैदा करने वाला खतरा उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा से आ रहा है। साल 2021 में अफगानिस्तान पर अफगान तालिबान के कब्जे के बाद से ‘तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान’ (TTP) ने अपने हमलों में अप्रत्याशित तेजी ला दी है। TTP के लगभग 6,000 खूंखार लड़ाके पाकिस्तान सरकार को गैर-इस्लामिक बताते हुए वहां शरिया कानून लागू करना चाहते हैं। खैबर पख्तूनख्वा में TTP के हमले 2016 में महज 93 थे, जो 2025 में बढ़कर 545 हो गए और इस साल अब तक 198 हमले हो चुके हैं। इस उग्रवाद ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच के कूटनीतिक संबंधों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है, जिसके जवाब में पाकिस्तान को काबुल के पास हवाई हमले तक करने पड़े हैं। जब जनरल मुनीर ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता कराने का नाटक कर रहे थे, तब TTP ने देश के भीतर 37 हमलों में 200 से अधिक पाकिस्तानियों को मौत के घाट उतार दिया। Indian Major US Military Award : अमेरिका में गूंजा भारतीय सेना का डंका, मेजर ने पूरी दुनिया को चौंकाया!

















