Indian Major US Military Award : भारतीय सेना के एक जांबाज अधिकारी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का मान बढ़ाते हुए एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम दर्ज की है। भारतीय सेना की प्रतिष्ठित 22 कुमाऊं रेजिमेंट में तैनात मेजर प्रभात मिश्रा ने संयुक्त राज्य अमेरिका के विख्यात ‘अमेरिकी सेना कमांड और जनरल स्टाफ कॉलेज’ (CGSC) में अपनी अद्वितीय बुद्धिमत्ता और रणनीतिक लेखन का लोहा मनवाया है। उन्होंने इस वैश्विक सैन्य संस्थान में दो सबसे शीर्ष और अत्यंत प्रतिष्ठित शैक्षणिक पुरस्कार (Academic Awards) जीतकर वैश्विक स्तर पर भारतीय रक्षा बलों की बौद्धिक क्षमता को प्रमाणित किया है। उनकी इस शानदार सफलता ने न केवल भारतीय सेना के गौरवशाली इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है, बल्कि दुनिया के सबसे ताकतवर देश के सैन्य विशेषज्ञों को भी उनकी प्रतिभा की सराहना करने पर मजबूर कर दिया है।

उत्कृष्ट सैन्य अनुसंधान के लिए मिला प्रतिष्ठित अवार्ड
मेजर प्रभात मिश्रा को उनकी असाधारण सैन्य रिसर्च और थीसिस के लिए सबसे पहले ‘बिरर-ब्रूक्स अवॉर्ड’ (Birrer-Brooks Award) से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार विशेष रूप से सबसे उत्कृष्ट ‘मास्टर ऑफ मिलिट्री आर्ट्स एंड साइंस थीसिस’ के उच्च स्तरीय लेखन के लिए प्रदान किया जाता है। इसके अतिरिक्त, सैन्य रणनीति और नेतृत्व क्षमता पर उनके गहन विचारों को देखते हुए उन्हें एक और शीर्ष सम्मान, ‘जनरल डगलस मैकआर्थर मिलिट्री लीडरशिप राइटिंग अवार्ड’ (General Douglas MacArthur Military Leadership Writing Award) से भी नवाजा गया है। एक ही सत्र में इन दोनों सर्वोच्च पुरस्कारों को अपने नाम करना किसी भी अंतरराष्ट्रीय सैन्य अधिकारी के लिए एक अत्यंत दुर्लभ और असाधारण उपलब्धि मानी जाती है।

92 देशों के जांबाज अधिकारियों को दी पटखनी
अमेरिका का यह प्रतिष्ठित सैन्य कॉलेज दुनिया भर के सबसे प्रमुख और शीर्ष सैन्य शिक्षा संस्थानों में से एक माना जाता है, जहां रणनीतिक युद्ध कौशल की बारीकियां सिखाई जाती हैं। इस वर्ष आयोजित किए गए 10 महीने के इस बेहद कठिन और कड़े नेतृत्व कार्यक्रम (Leadership Programme) में दुनिया भर के 92 अलग-अलग देशों के सैन्य अधिकारियों ने भाग लिया था। इस कड़े पाठ्यक्रम के समापन पर इस साल कुल 951 सैन्य अफसरों को उनकी उपाधि प्रदान की गई, जिनमें मेजर मिश्रा ने शीर्ष स्थान हासिल किया। इतिहास पर नजर डालें तो साल 1894 से लेकर अब तक इस वैश्विक संस्थान से दुनिया के लगभग 170 देशों के 8,700 से अधिक सैन्य अफसर उच्च स्तरीय सैन्य प्रशिक्षण और शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं।
भारतीय सैन्य अधिकारी बने मेजर प्रभात
मेजर प्रभात मिश्रा मूल रूप से भारतीय सेना की जांबाज और ऐतिहासिक ’22 कुमाऊं रेजीमेंट’ के एक बेहद होनहार और रणनीतिक सोच रखने वाले सैन्य अधिकारी हैं। उनकी इस दोहरी जीत की सबसे खास और ऐतिहासिक बात यह है कि वह वर्ष 1948 (यानी भारत की स्वतंत्रता के बाद) से लेकर अब तक के सैन्य इतिहास में पहले ऐसे भारतीय अधिकारी बन गए हैं, जिन्होंने प्रतिष्ठित ‘बिरर-ब्रूक्स अवॉर्ड’ पर अपना कब्जा जमाया है। इसके साथ ही, जनरल डगलस मैकआर्थर मिलिट्री लीडरशिप राइटिंग अवॉर्ड को जीतने वाले भी वह भारत के सबसे पहले सैन्य अधिकारी बन गए हैं। अंतरराष्ट्रीय सैन्य अध्ययन और अनुसंधान के क्षेत्र में उनके इस बेजोड़, गहन और विद्वतापूर्ण योगदान के लिए कॉलेज प्रबंधन द्वारा उन्हें विशेष रूप से ‘गोल्डन पेन’ (Golden Pen) के सम्मान से भी नवाजा गया है, जो भारत के लिए एक बेहद गर्व का क्षण है।










