Suspicion Of Human Trafficking : अंबिकापुर में मानव तस्करी की आशंका, झारखंड से कर्नाटक जा रहे 19 लोग रोके गए

Suspicion Of Human Trafficking : झारखंड से कर्नाटक ले जाए जा रहे 19 संदिग्ध यात्रियों को मानव तस्करी की आशंका के चलते अंबिकापुर में प्रशासन ने रोक लिया। प्रारंभिक जांच में अधिकांश के नाबालिग होने की आशंका जताई गई है, जबकि उनके दस्तावेजों में उम्र बालिग दर्ज है। गंतव्य, नियोक्ता और यात्रा की व्यवस्था को लेकर संतोषजनक जानकारी नहीं मिलने पर प्रशासन ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच तेज कर दी है और सभी के बयान बाल कल्याण समिति के समक्ष दर्ज कराए जा रहे हैं।

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गुरुवार की रात मिली गोपनीय सूचना के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड हेल्पलाइन, पुलिस तथा मानव संसाधन संस्कृति विकास परिषद (एमएसएसवीपी) की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए झारखंड के गढ़वा से दुर्ग जा रही रॉयल बस को अंबिकापुर के प्रतापपुर नाका के पास चिन्हित किया गया। सुरक्षा व्यवस्था के तहत टीम के सदस्य बस में ही तैनात कर दिए गए और बस के अंबिकापुर बस स्टैंड पहुंचते ही सभी संदिग्ध यात्रियों को उतारकर विस्तृत पूछताछ शुरू की गई।

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जांच के दौरान बस में 19 बालक-बालिकाएं मिलीं, जिनमें 16 बालिकाएं और तीन बालक शामिल हैं। इनके साथ एक महिला भी थी। सभी झारखंड के गढ़वा जिले के भंडरिया एवं आसपास के निवासी हैं। पूछताछ में उन्होंने कर्नाटक काम करने जाने की बात तो कही, लेकिन वे यह स्पष्ट नहीं बता सके कि किस शहर, किस कंपनी या किस व्यक्ति के पास उन्हें जाना था। कई बच्चों ने बताया कि उन्हें अच्छी नौकरी और बेहतर वेतन का आश्वासन दिया गया था, जबकि यात्रा की टिकट भी किसी अन्य व्यक्ति ने कटवाई थी, जो बस में सवार ही नहीं था। उसके संबंध में भी इन्हें जानकारी नहीं थी।

संयुक्त टीम को पूछताछ के दौरान कई तथ्य संदिग्ध मिले। अधिकांश बच्चों को अपने गंतव्य, नियोक्ता अथवा संपर्क व्यक्ति की स्पष्ट जानकारी नहीं थी। कुछ ने निजी घरों में काम करने तो कुछ ने जींस फैक्ट्री में पैकिंग का काम मिलने की बात कही, लेकिन किसी के पास ठोस जानकारी नहीं मिली। कुछ लोग घरेलू काम करने जाने के संबंध में भी जानकारी देने लगे। एक युवक ने बताया कि वह पहले भी कर्नाटक में काम कर चुका है और इस बार जींस कंपनी में पैकिंग कार्य के लिए जा रहा था।

बालक व बालिका गृह में रखा गया सभी को

गुरुवार की रात को समय अधिक होने के कारण 16 बालिकाओं को एमएसएसवीपी संचालित बालिका गृह तथा तीन बालकों को वसुंधरा खुला आश्रय गृह में सुरक्षित रखा गया। शुक्रवार को सभी को बाल कल्याण समिति, सरगुजा के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां उनके बयान, आयु सत्यापन, दस्तावेजों की जांच, परामर्श और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं जारी हैं। प्रशासन ने सभी के स्वजन से संपर्क कर उन्हें बच्चों के सुरक्षित होने की सूचना भी दे दी है।

प्रारंभिक जांच में कई बच्चों के आधार कार्ड में उम्र बालिग दर्ज है, जबकि शारीरिक रूप से वे नाबालिग प्रतीत हो रहे हैं। ऐसे में दस्तावेजों की प्रामाणिकता की भी जांच की मांग उठ रही है।

मानव तस्करी की आशंका पर चल रही जांच

अधिकारियों का कहना है कि आयु संबंधी सभी तथ्यों का विधिवत सत्यापन कराया जाएगा और यदि मानव तस्करी या फर्जी दस्तावेजों का कोई नेटवर्क सामने आता है तो संबंधित लोगों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।प्रशासन पूरे मामले को मानव तस्करी की आशंका के दृष्टिकोण से गंभीरता से लेते हुए हर पहलू की जांच कर रहा है। बाल कल्याण समिति के समक्ष दर्ज हो रहे बयानों और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बच्चों को संगठित गिरोह के माध्यम से ले जाया जा रहा था या वे किसी अन्य माध्यम से रोजगार के लिए भेजे जा रहे थे।

बाल कल्याण समिति द्वारा की जा रही है पूछताछ

अब तक की जांच में यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि इन लोगों को कर्नाटक ले जाने वाला कौन था? बस की टिकट करने वाले के संबंध में भी इन्हें कोई स्पष्ट जानकारी नहीं थी। बताया जा रहा है कि बस से अंबिकापुर आने के बाद इन्हें कोई व्यक्ति मिलता वही व्यक्ति इन्हें आगे ले जाता। इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं, उनकी जानकारी जुटाने का भी प्रयास किया जा रहा है। बाल कल्याण समिति द्वारा सभी का अलग-अलग बयान दर्ज कर यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि इन सभी के संपर्क में कौन आया। उसने क्या जानकारी देकर इन्हें कर्नाटक ले जाने के लिए तैयार किया। अलग-अलग बयान लेने से कई तथ्य स्पष्ट होने की संभावना जताई जा रही है।

पूछताछ के बाद ही स्पष्ट होगी स्थिति : प्रधान

महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यक्रम अधिकारी जेआर प्रधान ने बताया कि प्रकरण की जांच चल रही है।बस में कुल 20 लोग सवार थे। इनमें तीन लड़के, एक महिला और 16 लड़कियां शामिल हैं। चूंकि उन्हें ले जाने वाले का भी पता नहीं हैं। इस कारण चाइल्ड लाइन की टीम सभी से जानकारी एकत्र कर रही है। जांच के बाद स्थिति स्पष्ट होगी। सभी झारखंड के हैं। जरूरी हुआ तो वहां के अधिकारियों से भी संपर्क किया जाएगा।

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