Rahul Gandhi: कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हाल ही में संपन्न हुई विपक्षी ‘INDIA’ गठबंधन की एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान बेहद गंभीर और दूरगामी बातें कही हैं। उन्होंने इस उच्चस्तरीय बैठक में विपक्षी गुट के सामने खड़ी समकालीन राजनीतिक चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने गठबंधन में शामिल सहयोगी पार्टियों—जैसे समाजवादी पार्टी (सपा), तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद)—पर एक तरह से वैचारिक निशाना भी साधा और उनके ऊपर मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर भ्रम में रहने का एक बड़ा आरोप लगाया। इस पूरे घटनाक्रम के बीच उन्होंने गठबंधन को बचाए रखने के लिए अपनी और कांग्रेस की भूमिका की तुलना भगवान शिव के विषपान से की।
‘शैव परंपरा’ और नीलकंठ का उदाहरण देकर समझाया कांग्रेस का बड़ा दायित्व
गठबंधन की बैठक में आंतरिक मतभेदों और आलोचनाओं पर बोलते हुए राहुल गांधी ने अपने सहयोगियों से कहा कि आज कांग्रेस पार्टी के संदर्भ में जो भी बातें या आपत्तियां उठाई गई हैं, उन सभी का तीखा जवाब देना उनका प्राथमिक कार्य नहीं है। उन्होंने एक दार्शनिक अंदाज अपनाते हुए कहा कि उनका वास्तविक काम तो भारतीय संस्कृति की प्राचीन ‘शैव परंपरा’ की तरह सब कुछ अपने भीतर समाहित कर लेना या पी जाना है।
उन्होंने भगवान शिव के ‘नीलकंठ’ स्वरूप का विचार सामने रखा, जो सृष्टि की रक्षा के लिए सारा विष खुद पी गए थे। राहुल ने कहा कि सहयोगी दल उन पर या कांग्रेस पर जो भी टिप्पणी या आलोचना करना चाहें, कांग्रेस उसे चेहरे पर मुस्कान के साथ सहर्ष स्वीकार करेगी, क्योंकि कांग्रेस की भूमिका अन्य दलों को स्नेह के धागे में पिरोकर एक साथ बनाए रखने की है। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस का ढांचा अन्य क्षेत्रीय दलों से बुनियादी रूप से भिन्न है, क्योंकि इसका जन्म आधुनिक भारत के अस्तित्व में आने से पूर्व एक राष्ट्रीय प्रतिरोध आंदोलन के रूप में हुआ था।
क्षेत्रीय दलों की पुरानी कार्यशैली पर उठाया सवाल; टीएमसी मित्रों को दी चेतावनी
राहुल गांधी ने गठबंधन के दलों के भीतर चल रही वैचारिक समझ पर बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि उन्हें यह स्वीकार करते हुए अत्यंत दुख हो रहा है कि इस विपक्षी समूह के भीतर एक गहरा भ्रम व्याप्त है। उन्होंने सपा, टीएमसी और राजद जैसी पार्टियों का नाम लेते हुए सीधे तौर पर कहा कि वे इस गलतफहमी में जी रहे हैं कि जिन पारंपरिक राजनीतिक तौर-तरीकों का उपयोग वे अब तक करते आ रहे थे, वे भविष्य के चुनावों में भी पूरी तरह प्रभावी रहेंगे।
राहुल ने तर्क दिया कि वे पुराने तरीके केवल तभी तक कारगर थे जब तक भारतीय लोकतांत्रिक संस्थाएं और राज्य उन्हें काम करने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र और निष्पक्ष माहौल प्रदान करते थे, जो वर्तमान दौर में पूरी तरह समाप्त हो चुका है। भाजपा पर संस्थाओं को नियंत्रित करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने टीएमसी के अपने मित्रों का उदाहरण दिया और कहा कि वे अत्यधिक चुनावी आत्मविश्वास के कारण एक ख्याली दुनिया में जी रहे थे और जमीनी हकीकत को स्वीकार करने को तैयार नहीं थे।
नीतीश कुमार के पाला बदलने पर दी सफाई और भाजपा को हराने का मंत्र
इसके साथ ही राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि उनकी क्षेत्रीय दलों से किसी भी प्रकार की राजनैतिक लड़ाई लड़ने में कोई दिलचस्पी नहीं है, क्योंकि वे सभी उनके अभिन्न मित्र और सहयोगी हैं। उन्होंने चुनाव परिणामों का विश्लेषण करते हुए कहा कि विपक्ष वर्ष 2024 का आम चुनाव हारा नहीं था, बल्कि उसने मजबूती से मुकाबला किया था। गठबंधन के भीतर अक्सर उठने वाले एक बड़े सवाल का जवाब देते हुए राहुल ने साफ किया कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गठबंधन छोड़कर जाने की वजह न तो वह स्वयं थे और न ही कांग्रेस पार्टी की कोई नीति जिम्मेदार थी। उन्होंने अंत में निराशा के माहौल को खारिज करते हुए सभी नेताओं का हौसला बढ़ाया और कहा कि यदि सभी दल अपनी आपसी रणनीतियों में सुधार करें और पूरी तरह एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरें, तो भारतीय जनता पार्टी को शिकस्त देना बेहद आसान काम है।
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