TMC Rebel MP : पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और सांसद सुदीप बंदोपाध्याय ने देश की राजधानी दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से एक बेहद महत्वपूर्ण मुलाकात की है। इस हाई-प्रोफाइल बैठक के बाद से ही दिल्ली से लेकर पश्चिम बंगाल के राजनीतिक गलियारों में अटकलों और कयासों का बाजार बेहद गर्म हो गया है। राजनीतिक विश्लेषक इस मुलाकात को सामान्य शिष्टाचार भेंट नहीं मान रहे हैं, क्योंकि इससे ठीक पहले भी टीएमसी के कई बड़े नेता बागी रुख अपना चुके हैं और अब सुदीप की इस सक्रियता ने नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

भूपेंद्र यादव के आवास पर बागी सांसदों की गुप्त बैठक
इस बड़ी मुलाकात का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इससे पहले केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर ही तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों की एक अहम बैठक आयोजित हुई थी। बताया जा रहा है कि उस बैठक में टीएमसी के करीब 19 सांसद शामिल हुए थे, जो पार्टी नेतृत्व से काफी नाराज चल रहे हैं। अब इन बागी सांसदों की बैठक के तुरंत बाद सुदीप बंदोपाध्याय का भूपेंद्र यादव से मिलना इस बात की ओर पुरजोर इशारा कर रहा है कि वह भी इस विद्रोही गुट का हिस्सा बन सकते हैं। हालांकि, अभी तक दोनों ही प्रमुख नेताओं की ओर से इस मुलाकात के मुख्य एजेंडे को लेकर कोई भी आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद से ममता बनर्जी की पार्टी में बड़ी बगावत
दरअसल, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद से ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के भीतर आंतरिक कलह और बगावत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पार्टी में असंतोष की शुरुआत सबसे पहले विधायकों के एक बड़े गुट के अलग होने के साथ हुई थी। इसके बाद यह असंतोष लोकसभा तक पहुंच गया और अब 19 सांसदों का एक मजबूत गुट पार्टी से पूरी तरह अलग राह पकड़ चुका है। इस बागी गुट ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को बाकायदा एक औपचारिक पत्र लिखकर संसद भवन में अपने लिए अलग बैठने की व्यवस्था करने की मांग भी की है। टीएमसी की वरिष्ठ नेता शताब्दी रॉय ने भी इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि की थी।
छह बार के सांसद सुदीप बंदोपाध्याय के पाला बदलने की तेज हुई चर्चा
सुदीप बंदोपाध्याय पश्चिम बंगाल की बेहद महत्वपूर्ण कोलकाता उत्तर लोकसभा सीट से सांसद हैं और वह क्षेत्र में काफी लोकप्रिय हैं। वह अब तक रिकॉर्ड छह बार लोकसभा सांसद चुने जा चुके हैं और संसद के भीतर तृणमूल कांग्रेस के संसदीय दल के नेता के रूप में एक बेहद अहम व निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं। राज्य के विधानसभा चुनाव में टीएमसी को मिली करारी शिकस्त के बाद से ही पार्टी के भीतर संगठनात्मक स्तर पर लगातार टूट देखी जा रही है। अब इस टूट में सुदीप बंदोपाध्याय जैसे कद्दावर और अनुभवी नेता का नाम जुड़ने की चर्चाओं ने ममता बनर्जी की चिंताएं बढ़ा दी हैं। हालांकि, भविष्य के वास्तविक राजनीतिक घटनाक्रम को समझने के लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना होगा।
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