Jharkhand Student Protest: झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं को लेकर अभ्यर्थियों का विरोध-प्रदर्शन लगातार जारी है। आंदोलन कर रहे छात्रों ने सरकार के सामने अपनी मांगें स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सीधे बातचीत करने की मांग की है। इसी बीच सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच वार्ता को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्र नेताओं का कहना है कि बातचीत तभी सार्थक होगी, जब सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय लेगी।

छात्र नेताओं ने मांगों को लेकर रखा स्पष्ट रुख
प्रदर्शनकारी छात्र नेता और JLKM नेता देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि बातचीत के लिए कितने प्रतिनिधि जाएंगे, यह मुद्दा नहीं है। उनके मुताबिक आंदोलन कर रहे सभी छात्रों की मांगें एक जैसी हैं और सरकार को उन मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए उन्हें पूरा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों के बीच किसी तरह का मतभेद नहीं है और आंदोलन का उद्देश्य भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

छात्रों में गुटबाजी की बात से इनकार
प्रदर्शनकारी छात्र प्रेम ने भी छात्रों के किसी गुट में बंटे होने की बात को खारिज किया। उन्होंने कहा कि सभी अभ्यर्थी एकजुट होकर अपनी मांगों के लिए आंदोलन कर रहे हैं। प्रेम के अनुसार, इस आंदोलन की शुरुआत 25 जुलाई को देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व में बापू वाटिका से हुई थी। इसके बाद से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी लगातार आंदोलन में शामिल होकर सरकार से अपनी मांगें पूरी करने की अपील कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री से सीधे बातचीत की मांग
छात्र प्रेम ने कहा कि उन्हें जानकारी मिल रही है कि मुख्यमंत्री के बजाय सरकार के मंत्री छात्रों से बातचीत कर सकते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से स्वयं आंदोलनकारी छात्रों के साथ बातचीत करने की अपील की। छात्रों का कहना है कि उनकी समस्याएं सीधे मुख्यमंत्री के सामने रखी जानी चाहिए, ताकि फैसले लेने में किसी तरह की देरी न हो और मांगों पर स्पष्ट आश्वासन मिल सके।
खुले मैदान में बातचीत चाहते हैं अभ्यर्थी
आंदोलनकारी छात्रों ने बातचीत की प्रक्रिया को लेकर भी अपनी शर्तें सामने रखी हैं। उनका कहना है कि वार्ता बंद कमरे में नहीं होनी चाहिए। छात्र चाहते हैं कि बातचीत खुले मैदान में आयोजित की जाए और उसमें मीडिया प्रतिनिधियों को भी मौजूद रहने की अनुमति मिले। इसके साथ ही पूरी बातचीत की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने की मांग भी की गई है, ताकि वार्ता की प्रक्रिया पारदर्शी रहे और बाद में किसी तरह का भ्रम पैदा न हो।

स्वास्थ्य को लेकर भी छात्रों ने जताई चिंता
प्रदर्शनकारी छात्रों ने आंदोलन के दौरान अपने स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता व्यक्त की है। एक छात्र ने कहा कि डॉक्टर उन्हें पर्याप्त पानी पीने और अपनी सेहत का ध्यान रखने की सलाह दे रहे हैं। हालांकि, छात्रों का कहना है कि वे सरकार के उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने का इंतजार कर रहे हैं और इसके लिए अपने स्वास्थ्य तक की चिंता नहीं कर रहे। उन्होंने सरकार से जल्द सकारात्मक पहल करने की अपील की है।
बीजेपी ने हेमंत सरकार पर बोला हमला
JPSC-JSSC आंदोलन को लेकर झारखंड बीजेपी ने भी राज्य सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने आरोप लगाया कि 10 अगस्त को छात्रों द्वारा प्रस्तावित विधानसभा महाघेराव को देखते हुए सरकार दबाव में है। उन्होंने कहा कि छात्रों ने अपनी मांगें पहले ही स्पष्ट कर दी हैं और अब सरकार को उन पर निर्णय लेना चाहिए।
परीक्षा रद्द करने और CBI जांच की मांग
प्रतुल शाह देव के मुताबिक, आंदोलनकारी छात्रों की प्रमुख मांगों में विवादित परीक्षाओं को रद्द करना, पूरे मामले की CBI से जांच कराना और TDPL के माध्यम से आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करना शामिल है। बीजेपी प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि सरकार यदि गंभीर होती तो मंत्रियों की समिति मुख्यमंत्री से फोन पर बातचीत कर उनकी सहमति ले सकती थी। उन्होंने वार्ता को आगे टालने को लेकर भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।
10 अगस्त के महाघेराव पर टिकी नजरें
JPSC-JSSC CGL परीक्षा विवाद को लेकर जारी आंदोलन में अब 10 अगस्त का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। छात्रों ने विधानसभा महाघेराव का ऐलान किया है और फिलहाल वे अपनी मांगों पर कायम हैं। दूसरी ओर, सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच होने वाली अगली बातचीत से आंदोलन की दिशा तय हो सकती है। ऐसे में सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार छात्रों की मांगों पर क्या ठोस फैसला लेती है और क्या मुख्यमंत्री उनसे सीधे संवाद करते हैं।
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