Raigarh Jail Death : छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से एक बेहद संवेदनशील और तनावपूर्ण खबर सामने आई है, जहां जेल में बंद एक विचाराधीन कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। शनिवार को अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद आनन-फानन में कैदी को स्थानीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दाखिल कराया गया था, लेकिन डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। जैसे ही इस घटना की भनक मृतक के परिजनों और ग्रामीणों को लगी, बड़ी संख्या में लोग अस्पताल पहुंच गए। कैदी की मौत के कारणों पर गंभीर सवाल उठाते हुए लोगों ने अस्पताल परिसर में ही जमकर हंगामा और प्रदर्शन किया, जिससे वहां कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा हो गई।

जेल में दाखिले के महज चार दिन भीतर तोड़ा दम
पूरा मामला कोतरारोड थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम नवापारा का है। यहां के निवासी 28 वर्षीय संजय बघेल को पुलिस ने अवैध शराब बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया था। सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद 10 जून को उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया था। जेल प्रशासन की ओर से दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, 12 जून को अचानक संजय की तबीयत खराब हुई थी, जिसके बाद प्राथमिक तौर पर जेल के ही अस्पताल में उसका उपचार किया गया। हालांकि, जब उसके स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हुआ, तो शनिवार की सुबह उसे रायगढ़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया, जहां दोपहर में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

परिजनों ने लगाया जेल में बर्बरता और मारपीट का आरोप
संजय बघेल की असमय मौत की खबर मिलते ही उसके परिवार में कोहराम मच गया। देखते ही देखते ग्रामीण भी अस्पताल परिसर में एकत्र हो गए और उन्होंने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। परिजनों का सीधा और गंभीर आरोप है कि जेल के भीतर संजय के साथ बुरी तरह मारपीट और प्रताड़ना की गई थी, जिसके कारण उसकी हालत गंभीर हुई और आखिरकार उसकी जान चली गई। परिवार वालों का गुस्सा इस बात को लेकर भी भड़क गया कि मौत के कई घंटे बीत जाने के बाद भी प्रशासन ने उन्हें शव देखने की इजाजत नहीं दी, जिससे उनका संदेह और गहरा गया।
पीड़ित पिता ने लगाया पुलिस पर अवैध वसूली का आरोप
मृतक संजय के पिता प्यारे लाल बघेल ने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले गांव में एक सामाजिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ था। इसी दौरान पुलिसकर्मी शंभू चौहान ने उनके बेटे संजय और गांव के ही एक अन्य युवक को हिरासत में लिया था। पिता का दावा है कि पुलिस ने दूसरे युवक से मोटी रकम (पैसे) लेकर उसे मौके पर ही छोड़ दिया, जबकि उनके बेटे संजय को झूठे मामले में फंसाकर जेल भेज दिया। दुखी पिता ने अब पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पुलिसकर्मियों व जेल कर्मियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
ग्रामीणों में फूटा गुस्सा, न्यायिक जांच पर अड़े लोग
इस पूरे घटनाक्रम पर ग्राम सरपंच नंद कुमार बरेठ ने भी ग्रामीणों का पक्ष रखते हुए प्रशासन को घेरा। उन्होंने कहा कि जैसे ही संजय की मौत की खबर गांव में फैली, लोग स्तब्ध रह गए। जब ग्रामीण और परिजन अस्पताल पहुंचे, तो उन्हें शव देखने से काफी देर तक महकमे द्वारा रोका गया, जिसने आग में घी डालने का काम किया। ग्रामीणों और पीड़ित परिवार ने साफ कर दिया है कि वे सामान्य जांच से संतुष्ट नहीं होंगे; वे इस पूरे मामले की मजिस्ट्रियल या न्यायिक जांच कराने की मांग पर अड़े हुए हैं ताकि सच सामने आ सके।
मौके पर भारी पुलिस बल तैनात, जेल अधीक्षक ने नकारे आरोप
अस्पताल में बढ़ते तनाव और हंगामे को देखते हुए पुलिस के आला अधिकारी भारी बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी ग्रामीणों और परिजनों को समझाते हुए शांत कराने का प्रयास किया। उन्होंने आश्वस्त किया कि मजिस्ट्रेट की प्रत्यक्ष निगरानी में सभी जरूरी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं, और वीडियोग्राफी के साथ पंचनामा होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा। काफी समझाइश और आश्वासन के बाद लोग शांत हुए।
दूसरी तरफ, इस पूरे विवाद पर सफाई देते हुए जेल अधीक्षक जीएस सोरी ने मारपीट के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि संजय को 10 जून को जेल लाया गया था और 12 जून को तबीयत बिगड़ने पर नियमानुसार उसका इलाज शुरू किया गया था। जेल के भीतर किसी भी तरह की हिंसा नहीं हुई है। फिलहाल प्रशासन का कहना है कि मौत के सटीक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा, जिसके आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
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