US Iran Peace Deal : अमेरिका के साथ प्रस्तावित शांति समझौते को लेकर ईरान के भीतर राजनीतिक घमासान चरम पर पहुंच गया है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची के एक हालिया टेलीविजन इंटरव्यू ने देश के भीतर सुलग रही असंतोष की चिंगारी को भड़का दिया है, जिसके बाद कट्टरपंथी गुट खुलकर सड़क पर उतर आए हैं। ईरान के उत्तर-पूर्वी शहर मशहद में स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है, जहां दर्जनों प्रदर्शनकारियों ने विदेश मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शन के दौरान ‘अराघची इस्तीफा दो’ और ‘बेइज्जती करने वाले अराघची मुर्दाबाद’ जैसे कड़े और आक्रामक नारे लगाए गए। प्रदर्शनकारी गुटों का सीधा आरोप है कि यह समझौता पूरी तरह से ईरान के रणनीतिक और संप्रभु हितों के खिलाफ है और सरकार ने बातचीत के टेबल पर वाशिंगटन के सामने घुटने टेकते हुए जरूरत से ज्यादा रियायतें दे दी हैं।

मशहद में विदेश मंत्रालय कार्यालय के बाहर उमड़ा जनसैलाब
मशहद शहर में विदेश मंत्रालय के कार्यालय के बाहर हुआ प्रदर्शन बेहद आक्रामक और संगठित नजर आया। ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो फुटेज में देखा जा सकता है कि पारंपरिक काले चादर पहने बड़ी संख्या में महिलाएं इस विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कर रही हैं। प्रदर्शनकारियों के हाथों में लाल और काले रंग के झंडे थे, जो शहादत और विरोध का प्रतीक माने जाते हैं। भीड़ ने सीधे तौर पर विदेश मंत्री अब्बास अराघची को अपने निशाने पर लिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जो मंत्री देश के आत्मसम्मान का सौदा करे, उसे अपने पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

कट्टरपंथी गुटों की चेतावनी
ईरान के प्रभावशाली कट्टरपंथी राजनीतिक गुटों और सैन्य विचारकों ने इस समझौते की शर्तों पर गंभीर आपत्तियां जताई हैं। उनका तर्क है कि मौजूदा मसौदा तेहरान की दशकों पुरानी क्षेत्रीय पकड़ को कमजोर कर देगा। कट्टरपंथियों का सबसे बड़ा विरोध इस बात को लेकर है कि समझौते की वजह से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, यानी ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) पर ईरान का एकलौता और प्रभावी नियंत्रण समाप्त हो सकता है। यह जलडमरूमध्य ईरान की सबसे बड़ी भू-राजनीतिक और सामरिक ताकतों में से एक माना जाता है, जिसके दम पर वह वैश्विक महाशक्तियों को चुनौती देता रहा है।
टीवी इंटरव्यू में विदेश मंत्री का बयान बना गले की फांस
इस पूरे विवाद की मुख्य वजह विदेश मंत्री अब्बास अराघची का वह इंटरव्यू बना जो सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित हुआ था। अपने साक्षात्कार में अराघची ने खुलासा किया कि प्रस्तावित शांति समझौते के तहत अमेरिका अपनी उस नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने के लिए तैयार हो गया है, जिसे उसने होर्मुज स्ट्रेट में ईरान की सैन्य कार्रवाइयों के जवाब में लागू किया था। हालांकि, अराघची का यह कहना कि ‘होर्मुज स्ट्रेट का प्रशासनिक ढांचा अब पहले जैसा नहीं रहेगा’, कट्टरपंथियों को रास नहीं आया। भले ही विदेश मंत्री ने इसे ईरान की ‘प्रमुख प्रतिरोधक रणनीति’ का हिस्सा बताया, लेकिन विपक्ष इसे ईरान के पीछे हटने के रूप में देख रहा है।
राजधानी तेहरान तक फैली विरोध की आग
मशहद से शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन अब देश की राजनीतिक राजधानी तेहरान तक पहुंच चुका है। सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे कई अपुष्ट वीडियो में दावा किया गया है कि तेहरान स्थित विदेश मंत्रालय के मुख्य मुख्यालय के बाहर भी भारी भीड़ जमा हो गई है। हैरान करने वाली बात यह है कि प्रदर्शनकारी न केवल विदेश मंत्री अराघची, बल्कि ईरानी संसद (मज्लिस) के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ के इस्तीफे की भी मांग कर रहे हैं। गालिबाफ इस पूरी वार्ता प्रक्रिया में मुख्य वार्ताकार और मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं, जिसके कारण कट्टरपंथी उन्हें भी इस ‘संदेहास्पद समझौते’ के लिए जिम्मेदार मान रहे हैं।
शांति समझौते की टाइमलाइन को लेकर भ्रम
इस अंतरराष्ट्रीय समझौते को लेकर समयसीमा (Timeline) का सस्पेंस भी गहरा गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इस प्रक्रिया से जुड़े पाकिस्तानी अधिकारियों ने कूटनीतिक हलकों में बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि शांति समझौते को रविवार तक अंतिम रूप दिया जा सकता है, और इसके लिए एक हाई-टेक ‘इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर समारोह’ (Electronic Signing Ceremony) की तैयारियां भी पूरी कर ली गई हैं। हालांकि, ईरान की सरकार इस अमेरिकी जल्दबाजी और दावों को लेकर बेहद सतर्क और फूंक-फूंक कर कदम रखती दिखाई दे रही है।
ईरानी विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी दावों को नकारा
ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी और पाकिस्तानी दावों को खारिज करते हुए साफ किया है कि वे किसी भी तरह के दबाव में आकर जल्दबाजी में हस्ताक्षर नहीं करेंगे। मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने मीडिया से बात करते हुए रविवार को ही समझौता होने की किसी भी संभावना से इनकार किया और कहा, ‘यह कल नहीं होने जा रहा है।’ हालांकि, बघाई ने कूटनीतिक दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं किए; उन्होंने संकेत दिया कि अगर तकनीकी और रणनीतिक बिंदुओं पर सहमति बन जाती है, तो आने वाले कुछ दिनों के भीतर इस शांति समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है।
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