TMC Rebel Faction : अभिषेक बनर्जी की लोकसभा स्पीकर को चिट्ठी, बागी गुट को न दी जाए मान्यता

TMC Rebel Faction : तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रही राजनीतिक हलचल और संभावित टूट की खबरों के बीच पार्टी नेतृत्व ने एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। टीएमसी ने देश की संसद के निचले सदन यानी लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला को एक आधिकारिक पत्र भेजा है। इस पत्र के जरिए पार्टी ने लोकसभा अध्यक्ष से बेहद महत्वपूर्ण अपील की है। तृणमूल कांग्रेस ने साफ तौर पर कहा है कि यदि भविष्य में पार्टी का कोई भी धड़ा या बागी गुट अलग होने की कोशिश करता है, तो उसे किसी भी परिस्थिति में एक स्वतंत्र या अलग समूह के रूप में मान्यता न दी जाए। पार्टी इस कदम के जरिए संसद में अपनी एकजुटता को पूरी तरह से बरकरार रखना चाहती है और किसी भी प्रकार की आंतरिक बगावत को शुरुआती स्तर पर ही कुचलने की तैयारी में है।

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अभिषेक बनर्जी ने संभाली कमान

इस पूरे मामले में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने खुद कमान संभाली है। अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को लिखे अपने पत्र में पूरी स्थिति को स्पष्ट किया है। उन्होंने बहुत ही कड़े और स्पष्ट शब्दों में कहा है कि देश की संसद में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सिर्फ और सिर्फ एक ही एकीकृत पार्टी है। सदन के भीतर पार्टी का कोई दूसरा वजूद नहीं है।

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उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया है कि यदि टीएमसी के कुछ सांसद मिलकर खुद को एक अलग समूह या गुट के रूप में मान्यता देने की मांग करते हैं, तो उनकी इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया जाए। ऐसे किसी भी बागी गुट को लोकसभा सचिवालय की ओर से न तो कोई आधिकारिक मान्यता दी जानी चाहिए और न ही उन्हें किसी प्रकार की सरकारी सुविधाएं या विशेष विशेषाधिकार मिलने चाहिए।

फैसला लेने से पहले पार्टी का पक्ष सुनना अनिवार्य

अभिषेक बनर्जी ने अपने पत्र में संसदीय प्रक्रियाओं और नियमों का हवाला देते हुए एक और महत्वपूर्ण शर्त लोकसभा स्पीकर के सामने रखी है। उन्होंने लिखा है कि भविष्य में यदि तृणमूल कांग्रेस का कोई भी सांसद मुख्य दल से अलग होने के लिए व्यक्तिगत या सामूहिक रूप से कोई आवेदन या पत्र स्पीकर कार्यालय को सौंपता है, तो उस पर कोई भी एकतरफा निर्णय न लिया जाए। टीएमसी ने मांग की है कि ऐसे किसी भी बागी पत्र या आवेदन पर कोई भी अंतिम फैसला लेने से पहले लोकसभा अध्यक्ष को तृणमूल कांग्रेस पार्टी के आधिकारिक नेतृत्व का पक्ष अनिवार्य रूप से सुनना होगा। पार्टी का मानना है कि इससे किसी भी प्रकार की असंवैधानिक या अनैतिक राजनीतिक गतिविधि को रोका जा सकेगा और पार्टी की संप्रभुता अक्षुण्ण रहेगी।

दलबदल विरोधी कानून का चक्रव्यूह

अपने पत्र के अंतिम हिस्से में अभिषेक बनर्जी ने उन सांसदों को बेहद सख्त और सीधी चेतावनी दी है जो पार्टी लाइन से अलग जाने की सोच रहे हैं। उन्होंने साफ शब्दों में आगाह किया है कि अगर कोई भी सांसद पार्टी के स्थापित नियमों, अनुशासन और नीतियों के खिलाफ जाकर कोई कदम उठाता है या बगावत का रास्ता चुनता है, तो तृणमूल कांग्रेस उसके खिलाफ बेहद कड़ा रुख अख्तियार करेगी। पार्टी ऐसे किसी भी अनुशासनहीन सदस्य के खिलाफ संविधान की दसवीं अनुसूची यानी ‘दलबदल विरोधी कानून’ (Anti-Defection Law) के तहत तुरंत और सख्त कानूनी कार्रवाई करेगी। इसके साथ ही टीएमसी लोकसभा अध्यक्ष से ऐसे बागी सांसदों की संसद सदस्यता को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की आधिकारिक मांग करेगी, ताकि पार्टी में अनुशासन का कड़ा संदेश दिया जा सके।

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Chandan Das

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