Beirut Strike : मध्य पूर्व में शांति बहाली की कोशिशों के बीच इजरायल ने रविवार को लेबनान की राजधानी बेरूत पर भीषण हवाई हमला किया। यह हमला ऐसे बेहद संवेदनशील समय पर हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौता अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इस सैन्य कार्रवाई पर गहरी निराशा व्यक्त करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट साझा की। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बेरूत पर हुआ यह हमला बिल्कुल नहीं होना चाहिए था, विशेषकर ऐसे महत्वपूर्ण दिन पर जब हम ईरान के साथ शांति समझौते के बेहद करीब हैं। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और पीछे हटने की अपील की ताकि पूरे क्षेत्र में शांति स्थापित हो सके।
अमेरिकी मध्यस्थता और वादों पर उठाए गंभीर सवाल
इस अप्रत्याशित हमले के बाद ईरान की ओर से कड़ी और तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान के कद्दावर नेता और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघर गालिबाफ ने अमेरिका की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। गालिबाफ ने कहा कि इस नाजुक मोड़ पर इजरायल द्वारा किया गया यह हमला दो ही बातें साबित करता है— या तो अमेरिका वास्तव में इस युद्ध को समाप्त नहीं करना चाहता, या फिर उसका अपने सहयोगी इजरायल पर कोई नियंत्रण नहीं रह गया है। ईरानी नेता ने साफ चेतावनी दी कि अगर अमेरिका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किए गए अपने वादों को पूरा करने में अक्षम साबित होता है, तो भविष्य में शांति वार्ता की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना बेहद मुश्किल हो जाएगा।
इजरायल ने हिजबुल्लाह के खिलाफ रक्षात्मक कार्रवाई बताया
लेबनान के स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, बेरूत के घनी आबादी वाले दहिया इलाके को निशाना बनाकर किए गए इस इजरायली हवाई हमले में कम से कम 3 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है और कई अन्य घायल हुए हैं। इस सैन्य कार्रवाई पर अपनी सफाई देते हुए इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि उनके देश ने यह कदम पूरी तरह अपनी आत्मरक्षा में उठाया है। नेतन्याहू के मुताबिक, हिजबुल्लाह ने इससे पहले उत्तरी इजरायल के रिहायशी इलाकों को निशाना बनाकर कई रॉकेट दागे थे, जिसके जवाब में इजरायली सेना को यह जवाबी कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की तैयारी और पाकिस्तान का बड़ा संकेत
इस तनाव के बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उम्मीद जताई थी कि ईरान के साथ दशकों पुराने विवाद को समाप्त करने वाले समझौते पर रविवार को ही हस्ताक्षर होने वाले हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस समझौते के तुरंत बाद सामरिक और व्यापारिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को वैश्विक यातायात के लिए पूरी तरह खोल दिया जाएगा। ट्रंप का यह बयान शनिवार को पाकिस्तान द्वारा दिए गए उस कूटनीतिक संकेत के बाद आया था, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता अंतिम दौर में है और रविवार को इस समझौते पर इलेक्ट्रॉनिक माध्यम (डिजिटल हस्ताक्षर) से मुहर लग सकती है।
ट्रंप की दोटूक चेतावनी
शांति की वकालत करने के साथ-साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक कड़ा संदेश भी दिया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि यह ऐतिहासिक समझौता अमेरिकी अपेक्षाओं और शर्तों के अनुरूप नहीं रहता है, तो वाशिंगटन के पास अन्य कड़े विकल्प भी खुले हैं। ट्रंप ने कहा, “हम ईरान और पूरे पश्चिम एशिया के साथ लंबे समय तक सकारात्मक माहौल में काम करने की इच्छा रखते हैं। हमारी पूरी कोशिश है कि यह शांति प्रक्रिया जल्दी, आसान और बिना किसी बाधा के सुचारु रूप से पूरी हो जाए। लेकिन यदि ऐसा नहीं हो पाता है, तो हमारे पास अंतिम सैन्य विकल्प भी मौजूद है, हालांकि हम उम्मीद करते हैं कि हमें कभी उसका इस्तेमाल करने की नौबत न आए।”
Teacher Recruitment Scam : करोड़ों का शिक्षक भर्ती घोटाला, ईडी के चक्रव्यूह में कैसे घिरे अभिषेक बनर्जी?