Teacher Recruitment Scam : पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी (ED) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। ईडी ने इस मामले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी को नया समन जारी किया है। उन्हें सोमवार को कोलकाता स्थित ईडी के जोनल कार्यालय में पूछताछ के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। यह पूरा मामला प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति के दौरान हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं, धांधली और भारी भ्रष्टाचार से संबंधित है।

सीबीआई की एफआईआर और हाई कोर्ट का सख्त रुख
इस मामले की शुरुआत कलकत्ता हाई कोर्ट के कड़े निर्देश के बाद हुई थी, जिसके तहत केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की थी। ईडी इसी एफआईआर को आधार बनाकर मनी लॉन्ड्रिंग के कोण से जांच कर रही है। जांच एजेंसियों का स्पष्ट आरोप है कि प्राथमिक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में स्थापित नियमों और कानूनों का खुलेआम उल्लंघन किया गया। आपराधिक साजिश के तहत उन उम्मीदवारों को नौकरियां बांटी गईं जो अयोग्य थे, जिनका नाम मेरिट लिस्ट में नहीं था या जिनके रैंक बेहद कम थे। इस प्रक्रिया के कारण योग्य और हकदार उम्मीदवारों को रोजगार के अवसर से वंचित कर दिया गया।

चंद्रनाथ सिन्हा पर ईडी का शिकंजा और संपत्तियों की जब्ती
प्रवर्तन निदेशालय ने इस घोटाले से जुड़ी अपनी छठी पूरक चार्जशीट (अभियोजन शिकायत) 6 अगस्त 2025 को अदालत में पेश की थी। इस शिकायत में चंद्रनाथ सिन्हा को मनी लॉन्ड्रिंग के मुख्य आरोपियों में से एक के रूप में नामजद किया गया है। इससे पहले, मार्च 2024 में जब जांच एजेंसी ने चंद्रनाथ सिन्हा के ठिकानों पर छापेमारी की थी, तब उनके घर से 41 लाख रुपये की नकदी और कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद हुए थे। वित्तीय जांच में यह बात भी सामने आई कि उनके नियंत्रण वाले विभिन्न बैंक खातों में भारी मात्रा में कैश जमा कराया गया था। ईडी का दावा है कि इस अवैध कमाई से बीरभूम जिले के बोलपुर में परिवार के सदस्यों के नाम पर कई अचल संपत्तियां खरीदी गईं, जिन्हें अब अस्थाई रूप से कुर्क कर लिया गया है।
अर्पिता मुखर्जी के ठिकानों से करोड़ों की नकदी और सोना बरामद
इस महाघोटाले की परतें तब खुलनी शुरू हुईं जब पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी की बेहद करीबी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के विभिन्न परिसरों पर छापेमारी की गई। ईडी की इस कार्रवाई में अर्पिता मुखर्जी के ठिकानों से कुल 49.80 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी और लगभग 5.08 करोड़ रुपये के सोने के कीमती आभूषण बरामद किए गए थे। इस जब्ती ने राज्य के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया था।
मामले में अब तक सात गिरफ्तारियां और करोड़ों की जब्ती
जांच एजेंसी इस पूरे मामले में अब तक पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी सहित कुल सात प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। ईडी द्वारा अब तक इस मामले में करीब 98.65 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थाई रूप से कुर्क की जा चुकी हैं। अगर प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले में कुल जब्ती और कुर्की के आंकड़ों को जोड़ा जाए, तो यह राशि लगभग 154.91 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।
अदालत में चार्जशीट और 54 आरोपियों पर तय हुए आरोप
ईडी ने इस मामले में पहली अभियोजन शिकायत 19 सितंबर 2022 को दायर की थी। इसके बाद जांच के दायरे को बढ़ाते हुए अदालत में छह पूरक शिकायतें भी पेश की गईं। वर्तमान में इस घोटाले से जुड़े 54 व्यक्तियों और विभिन्न संस्थाओं के खिलाफ अदालत में आरोप तय किए जा चुके हैं। इन मुख्य आरोपियों में पार्थ चटर्जी, अर्पिता मुखर्जी और पूर्व विधायक माणिक भट्टाचार्य के नाम प्रमुखता से शामिल हैं।
भर्ती घोटालों में कुल मिलाकर 641 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच
ईडी के अनुसार, भ्रष्टाचार का यह खेल सिर्फ प्राथमिक शिक्षक भर्ती तक ही सीमित नहीं था। इसके अलावा स्कूल सेवा आयोग (SSC) के तहत सहायक शिक्षक भर्ती तथा ग्रुप-सी और ग्रुप-डी कर्मचारी भर्ती घोटालों में भी व्यापक स्तर पर कार्रवाई की जा रही है। इन अन्य सहयोगी मामलों में अब तक लगभग 486 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियां कुर्क की गई हैं। कोलकाता स्थित ईडी कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के इन सभी भर्ती घोटालों से जुड़े मामलों में अब तक कुल मिलाकर लगभग 641 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां अटैच की जा चुकी हैं।
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