Bilaspur Fraud Case : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक 87 वर्षीय बेबस बुजुर्ग महिला ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इच्छामृत्यु की मांग की है। पीड़िता का आरोप है कि एक रसूखदार राजनीतिक पंच ने उनके साथ करीब 90 लाख रुपए की धोखाधड़ी की है। बार-बार पुलिस के चक्कर काटने और लगातार शिकायतों के बावजूद जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो हताश होकर बुजुर्ग महिला को न्याय के लिए यह आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा।

अपनों को खो चुकी बुजुर्ग महिला टोकरी बेचकर चला रही हैं जीवनयापन
यह पूरा मामला बिलासपुर के कोटा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बेलगहना चौकी इलाके का है। पीड़िता बालकुंवर बसोर के जीवन की कहानी अत्यंत दुखद है, क्योंकि उनके पति और तीनों बेटों की पहले ही मौत हो चुकी है। इस दुनिया में अब वह पूरी तरह अकेली हैं और अपनी बेटी के साथ जीवन गुजार रही हैं। घर चलाने के लिए वह झौवा-टुकनी (बांस की टोकरी) बेचकर किसी तरह अपना पेट पालती हैं। उनकी इसी लाचारी और अकेलेपन का फायदा आरोपी ने उठाया।

केवाईसी और बीमा सुधारने के नाम पर भाजपा समर्थित पंच ने जीता भरोसा
बुजुर्ग महिला बालकुंवर का आरोप है कि केन्दा ग्राम पंचायत के भाजपा समर्थित पंच फगुन प्रसाद प्रजापति उर्फ मोनू ने उनकी बेबसी को भांप लिया था। आरोपी ने पहले तो उनकी हर संभव मदद करने का नाटक रचकर उनका गहरा भरोसा जीता। इसके बाद, बैंक में केवाईसी (KYC) अपडेट कराने, धान का पंजीयन कराने और वाहनों का बीमा संबंधी सरकारी काम कराने के बहाने उसने बुजुर्ग महिला को अपने जाल में फंसाया और धीरे-धीरे उनकी पूरी जीवनभर की पूंजी हड़प ली।
धोखे से बैंक खाते से उड़ाए 23 लाख और हड़प ली ढाई हेक्टेयर जमीन
शिकायत के मुताबिक, आरोपी फगुन प्रसाद ने 14 दिसंबर 2021 को बुजुर्ग महिला को झांसे में लिया। उसने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के नाम पर महिला के खाते से 23 लाख रुपए चालाकी से अपने बैंक खाते में ट्रांसफर कर लिए। ठगी का यह सिलसिला यहीं नहीं थमा; आरोपी ने ग्राम पंचायत लूफा में स्थित बुजुर्ग महिला की करीब ढाई हेक्टेयर बेशकीमती कृषि भूमि भी छल-कपट से अपने नाम करा ली। पीड़िता का कहना है कि आरोपी उनके घर के जेवरात भी ले गया।
धान पंजीयन के बहाने तहसील ले जाकर दस्तावेजों पर लगवाए अंगूठे
बुजुर्ग महिला ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि साल 2022 में आरोपी मोनू उन्हें कई बार तहसील कार्यालय लेकर गया था। उसने महिला से कहा कि सरकारी दर पर धान बेचने के लिए नए सिरे से पंजीयन कराना अनिवार्य है। इस प्रक्रिया के नाम पर उसने कई कोरे और संदिग्ध दस्तावेजों पर बुजुर्ग महिला के अंगूठे के निशान ले लिए। बाद में जब धान बेचने की बारी आई, तो पता चला कि कोई पंजीयन ही नहीं हुआ है, बल्कि उनकी 6.34 एकड़ जमीन आरोपी के नाम हो चुकी है।
मृतक बेटों की कार और अन्य गाड़ियां भी आरोपी ने अपने नाम कराईं
जमीन और नकदी के अलावा, आरोपी की नजर बुजुर्ग महिला के मृत बेटों के वाहनों पर भी थी। उसने बीमा रिन्यू कराने और सरकारी दस्तावेज अपडेट करने का झांसा देकर परिवार की सेंट्रो कार, एक्टिवा स्कूटर और ‘छोटा हाथी’ (कमर्शियल वाहन) को भी चालाकी से अपने नाम पर ट्रांसफर करवा लिया। इस बात का खुलासा तब हुआ जब बुजुर्ग महिला के नाती ने परिवहन विभाग के रिकॉर्ड की जांच की, जिससे परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई।
पुलिसिया कार्रवाई में देरी और कुछ पुलिसकर्मियों पर लगे गंभीर आरोप
पीड़ित परिवार का आरोप है कि उन्होंने न्याय के लिए बेलगहना पुलिस चौकी, एसडीओपी कार्यालय कोटा और एसपी कार्यालय बिलासपुर के चक्कर काटे, लेकिन महीनों तक उनकी शिकायत पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। बुजुर्ग महिला ने आरोप लगाया कि पुलिस जांच के नाम पर सिर्फ उन्हें दौड़ाती रही। उन्होंने कुछ स्थानीय पुलिसकर्मियों पर आरोपी पंच से साठगांठ करने और रिश्वत लेकर मामले को दबाने का बेहद गंभीर आरोप भी लगाया है, जिससे खाकी की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
एसएसपी रजनेश सिंह के निर्देश पर आरोपी पंच के खिलाफ मुकदमा दर्ज
जब स्थानीय स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हुई, तो पीड़ित बालकुंवर बसोर न्याय की आस में आईजी कार्यालय पहुंचीं और वहां अपनी दर्दभरी दास्तान सुनाते हुए इच्छामृत्यु का आवेदन सौंप दिया। बुजुर्ग महिला द्वारा इच्छामृत्यु की मांग की खबर मिलते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। मामला एसएसपी रजनेश सिंह के संज्ञान में आते ही उन्होंने तुरंत जांच के आदेश दिए। इसके बाद आरोपी फगुन प्रसाद प्रजापति के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में मामला दर्ज कर पुलिस बैंक और जमीन के दस्तावेजों की जांच कर रही है।
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