Maharashtra politics : महाराष्ट्र की सियासत में जारी घमासान के बीच नागपुर जिले से उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के लिए एक बेहद निराश करने वाली और बुरी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के ‘ऑपरेशन टाइगर’ और उद्धव ठाकरे के ‘ऑपरेशन वुल्फ’ की राजनीतिक जंग के बीच अब जमीनी स्तर पर बड़े फेरबदल शुरू हो गए हैं। नागपुर में शिवसेना उबाठा के संगठन को उस वक्त गहरा आघात लगा, जब पार्टी के नागपुर शहर प्रमुख नितिन तिवारी ने अपने कई वरिष्ठ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ उद्धव गुट का साथ छोड़ने का फैसला कर लिया। नितिन तिवारी ने आधिकारिक तौर पर उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली मूल शिवसेना का दामन थाम लिया है, जिससे विदर्भ क्षेत्र में उद्धव गुट का सांगठनिक ढांचा पूरी तरह से चरमरा गया है।

मुंबई में श्रीकांत शिंदे की मौजूदगी में हुआ बड़ा दलबदल, उद्धव सेना के पदाधिकारी टूटे
राजनीतिक गलियारों से मिल रही पुख्ता जानकारी के अनुसार, नितिन तिवारी और उनके तमाम साथियों का यह दलबदल मुंबई में संपन्न हुआ। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के सांसद पुत्र डॉ. श्रीकांत शिंदे की गरिमामयी मौजूदगी में इन सभी नेताओं ने शिवसेना की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की। ठाकरे गुट को अलविदा कहने वालों में केवल नितिन तिवारी ही अकेले नहीं थे, बल्कि उनके साथ शिवसेना उबाठा के नागपुर शहर सचिव, युवा सेना के शहर प्रमुख और कामगार सेना के शहर संगठक जैसे कई अग्रिम संगठनों के शीर्ष पदाधिकारियों ने भी सामूहिक रूप से पार्टी छोड़ने का बड़ा फैसला लिया। नागपुर जैसे महत्वपूर्ण शहर के मुख्य पदाधिकारियों के इस तरह अचानक चले जाने से उद्धव ठाकरे के स्थानीय संगठन को ऐसा झटका लगा है, जिससे उबरने में पार्टी को लंबा समय लग सकता है।

संजय राउत के मजबूत संगठन के दावों के बीच निचले स्तर पर लगी बड़ी सेंध
नागपुर के इन कद्दावर नेताओं और पदाधिकारियों ने उद्धव ठाकरे गुट को यह करारा झटका ठीक उस समय दिया है, जब महज कुछ समय पहले ही पार्टी के मुख्य प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने मीडिया के सामने यह दावा किया था कि उनकी पार्टी पूरी तरह मजबूत है और सभी नेता व कार्यकर्ता दृढ़ता से संगठन के साथ खड़े हैं। संजय राउत ने उन तमाम कयासों और राजनीतिक चर्चाओं को सिरे से खारिज कर दिया था, जिसमें कहा जा रहा था कि शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों को तोड़ने के लिए शिंदे गुट द्वारा ‘ऑपरेशन टाइगर’ चलाया जा रहा है। हालांकि, मौजूदा टूट सांसदों के स्तर पर न होकर शहर के मुख्य पदाधिकारियों के स्तर पर हुई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निचले स्तर पर ही सही, एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने उद्धव गुट के मजबूत किलों में सफलतापूर्वक सेंधमारी शुरू कर दी है।
‘ऑपरेशन टाइगर’ बनाम ‘ऑपरेशन वुल्फ’ की दिलचस्प और आक्रामक राजनीतिक जंग
महाराष्ट्र की इस सियासी लड़ाई में प्रतीकों की राजनीति भी बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है। गौरतलब है कि अविभाजित और मूल शिवसेना का पारंपरिक प्रतीक चिह्न हमेशा से एक दहाड़ता हुआ ‘बाघ’ रहा है, जिसे खुद पार्टी के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे ने तैयार किया था। इसी प्रतीक को आधार बनाकर शिंदे गुट के अभियान का नाम राजनीतिक हलकों में ‘ऑपरेशन टाइगर’ पड़ा है। इसके जवाब में कुछ समय पहले संजय राउत ने आक्रामक रुख अपनाते हुए घोषणा की थी कि शिवसेना (उबाठा) अपने विरोधियों को राजनीतिक रूप से मात देने और उन्हें निशाना बनाने के लिए ‘ऑपरेशन वुल्फ’ (भेड़िया अभियान) की शुरुआत करेगी। राउत का यह सीधा इशारा एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले धड़े की तरफ था, लेकिन जमीन पर फिलहाल ‘ऑपरेशन टाइगर’ हावी होता दिख रहा है।
उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई सांसदों की महत्वपूर्ण बैठक में कई चेहरों की गैरमौजूदगी
पार्टी के भीतर चल रही इस उथल-पुथल के बीच, रविवार (14 जून) को मुंबई में पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई सांसदों की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक के बाद भी कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। इस समीक्षा बैठक में पार्टी के कुल 9 लोकसभा सांसदों में से प्रत्यक्ष रूप से केवल चार सांसद ही मातोश्री पहुंच पाए थे, जिनमें अरविंद सावंत, अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और संजय पाटील शामिल थे। हालांकि, इस अनुपस्थिति पर सफाई देते हुए संजय राउत ने कहा था कि ओम प्रकाश राजे निंबालकर, भाउसाहेब वाकचौरे, नागेश बापूराव पाटिल अष्टिकर और संजय देशमुख ने ऑनलाइन (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) के माध्यम से बैठक में अपनी हाजिरी दर्ज कराई थी, जबकि संजय जाधव ने फोन पर सीधे उद्धव ठाकरे से बातचीत की थी। राउत ने दावा किया कि सांसदों में कोई नाराजगी नहीं है और सभी पूरी तरह पार्टी के साथ एकजुट हैं।
Read More : YouTube Tips : यूट्यूब देखते ही उड़ जाता है इंटरनेट डेटा? आज ही ऑन करें सेटिंग











