Gujarat BJP : देश की राजनीति में इन दिनों कई प्रमुख दलों के भीतर असंतोष और बगावत की खबरें सामने आ रही हैं। पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को आंतरिक मतभेदों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) में भी असहमति के स्वर सुनाई देने लगे हैं। इसी बीच अब गुजरात में भारतीय जनता पार्टी के भीतर भी संगठनात्मक विवाद और नाराजगी की खबरों ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है।

भाजपा विधायक दर्शना देशमुख ने जताई नाराजगी
गुजरात के नर्मदा जिले से भाजपा विधायक डॉ. दर्शना देशमुख ने पार्टी के एक कार्यक्रम के दौरान सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी व्यक्त की। बताया जा रहा है कि कार्यक्रम में उन्हें अपेक्षित सम्मान और प्रोटोकॉल नहीं मिलने से वे काफी आहत हुईं। नाराजगी इतनी बढ़ गई कि उन्होंने कार्यक्रम बीच में छोड़ दिया और बाद में सांकेतिक उपवास पर बैठ गईं।विधायक दर्शना देशमुख ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि उनके साथ इसी तरह का व्यवहार जारी रहा और उनका सम्मान नहीं किया गया, तो वे अपने पद और पार्टी दोनों से इस्तीफा देने पर विचार कर सकती हैं। उनके इस बयान ने राज्य की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है।

आम आदमी पार्टी ने दिया खुला समर्थन
विवाद बढ़ने के बाद आम आदमी पार्टी ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। पार्टी ने विधायक दर्शना देशमुख के साथ हुए कथित अपमान को केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे आदिवासी समाज का अपमान बताया। पार्टी नेताओं का कहना है कि दर्शना देशमुख आदिवासी समुदाय का प्रतिनिधित्व करती हैं और उनके साथ हुआ व्यवहार समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है।आम आदमी पार्टी के नेता चैतर वसावा ने कहा कि यह केवल एक महिला विधायक का मामला नहीं है, बल्कि प्रदेश के आदिवासी समाज के सम्मान से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा लंबे समय से आदिवासी नेताओं और जनप्रतिनिधियों को उचित सम्मान देने में विफल रही है।
भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप
चैतर वसावा ने कहा कि भाजपा सरकार और संगठन में आदिवासी नेताओं, सांसदों और विधायकों को वह सम्मान नहीं मिलता जिसके वे हकदार हैं। उनके अनुसार, यदि विधायक दर्शना देशमुख को पार्टी में उचित सम्मान मिला होता, तो उन्हें इस तरह सार्वजनिक रूप से नाराजगी जाहिर करने और इस्तीफे की चेतावनी देने की आवश्यकता नहीं पड़ती।आप नेता ने आगे कहा कि यदि विधायक स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रही हैं, तो उन्हें पार्टी और पद से इस्तीफा देने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि आदिवासी समाज और आम आदमी पार्टी उनके साथ खड़ी है तथा किसी भी प्रकार के अपमान को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान हुआ विवाद
पूरा विवाद नर्मदा जिले के राजपीपला स्थित अंबेडकर हॉल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सामने आया। यह कार्यक्रम केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के दौरान किसी बात को लेकर विधायक दर्शना देशमुख नाराज हो गईं और मंच छोड़कर बाहर चली गईं।
मंच पर ही जताई नाराजगी
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मंच से उतरते समय विधायक ने सवाल उठाया कि क्या पार्टी के कार्यक्रम में उन्हें अपमानित करने के लिए बुलाया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि वह क्षेत्र की निर्वाचित विधायक हैं और कार्यक्रम में उनके लिए निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया। इस दौरान उन्होंने अपने साथ हुए व्यवहार पर खुलकर असंतोष व्यक्त किया।
गांधी प्रतिमा के पास बैठीं सांकेतिक उपवास पर
कार्यक्रम छोड़ने के बाद दर्शना देशमुख महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास पहुंचीं और वहां सांकेतिक उपवास पर बैठ गईं। इस कदम को उन्होंने अपने विरोध और असंतोष के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया। उनके इस फैसले ने न केवल स्थानीय राजनीति बल्कि पूरे राज्य में राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है।
भाजपा के लिए बन सकता है बड़ा राजनीतिक मुद्दा
विधायक की नाराजगी और इस्तीफे की चेतावनी ने भाजपा के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। विपक्ष इस मुद्दे को आदिवासी सम्मान और संगठनात्मक असंतोष से जोड़कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है। अब सभी की नजरें भाजपा नेतृत्व पर टिकी हैं कि वह इस विवाद को किस तरह सुलझाता है और नाराज विधायक को मनाने के लिए क्या कदम उठाता है।
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