TMC सांसद कीर्ति आजाद ने पार्टी के बागी सांसदों को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेताओं पर दबाव बनाया गया और उन्हें डराया-धमकाया गया। आजाद ने इसे राजनीतिक दबाव की रणनीति बताया है।
TMC सांसद कीर्ति आजाद ने पार्टी के बागी सांसदों को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेताओं पर दबाव बनाया गया और उन्हें डराया-धमकाया गया। आजाद ने इसे राजनीतिक दबाव की रणनीति बताया है।

TMC Crisis: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग होकर एनसीपीआई में शामिल हुए बागी सांसदों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। टीएमसी नेता कीर्ति आजाद ने दावा किया है कि बागी गुट में शामिल कई सांसद अपनी इच्छा से पार्टी नहीं छोड़ना चाहते थे, बल्कि उन पर दबाव बनाया गया है। उन्होंने कहा कि करीब 7 से 8 सांसद ऐसे हैं, जो जबरन इस गुट के साथ गए हैं और वे एनडीए गठबंधन का हिस्सा नहीं बनना चाहते।

कीर्ति आजाद ने आरोप लगाया कि कुछ बागी सांसदों पर राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि कई नेताओं और उनके परिवारों को डराया-धमकाया जा रहा है। आजाद ने कहा कि कुछ मामलों में परिवार के सदस्यों के साथ कथित तौर पर मारपीट तक की गई है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

टीएमसी नेता कीर्ति आजाद ने एनसीपीआई की राजनीतिक स्थिति पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यह एक गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है, जिसके कारण कई संवैधानिक और संसदीय प्रक्रियाओं को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से लोकसभा अध्यक्ष भी इस मामले में कोई अंतिम निर्णय नहीं ले पा रहे हैं।उन्होंने दावा किया कि बागी सांसदों में से कई की स्थिति अभी साफ नहीं है। उनके मुताबिक, कुछ सांसद एनडीए गठबंधन में शामिल नहीं होना चाहते, लेकिन दबाव की वजह से उन्होंने यह कदम उठाया है। आजाद ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस मजबूत स्थिति में वापस आएगी और पार्टी का नेतृत्व केवल ममता बनर्जी ही करेंगी।
कीर्ति आजाद का बयान ऐसे समय में आया है, जब एनसीपीआई के कुछ सांसदों के रुख को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इससे पहले 4 अगस्त को एनडीए सहयोगी दलों की बैठक में एनसीपीआई के तीन सांसदों के शामिल नहीं होने से राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई थीं।इन सांसदों में खलीलुर रहमान, अबू ताहेर खान और यूसुफ पठान का नाम शामिल है। इससे पहले 28 जून को हुई एनडीए संसदीय दल की पहली बैठक में भी इन सांसदों ने हिस्सा नहीं लिया था। उनके लगातार दूरी बनाए रखने से गठबंधन को लेकर अटकलें बढ़ गई हैं।
एनसीपीआई सांसद अबू ताहेर खान ने अपने बयान से राजनीतिक स्थिति को और स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि वह न तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो रहे हैं और न ही एनडीए गठबंधन का हिस्सा बन रहे हैं।उन्होंने कहा कि एनडीए की बैठक में वह और उनके साथी सांसद शामिल नहीं हुए, लेकिन मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की ओर से बुलाई गई बैठक में वे जरूर शामिल होंगे, क्योंकि वह उनके क्षेत्र के विकास कार्यों से जुड़ी बैठक थी। उन्होंने यह भी कहा कि वह मुसलमानों के खिलाफ किसी भी कदम का समर्थन नहीं करेंगे।

इससे पहले टीएमसी के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष भी दावा कर चुके हैं कि पार्टी छोड़कर गए कई सांसद और विधायक दोबारा तृणमूल कांग्रेस में लौटना चाहते हैं। उन्होंने कहा था कि कई बागी नेता ममता बनर्जी के संपर्क में हैं।दिलीप घोष ने बीजेपी पर भी आरोप लगाया था कि वह बागी नेताओं पर दबाव बनाने के लिए जांच एजेंसियों और पुलिस का इस्तेमाल कर रही है। हालांकि, बीजेपी की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया दी गई है और उन्हें राजनीतिक आरोप बताया गया है।
बागी सांसदों को लेकर चल रही बयानबाजी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है। एक ओर टीएमसी नेता दावा कर रहे हैं कि कई सांसद दबाव में हैं, वहीं दूसरी ओर बागी गुट के नेता अपने फैसलों को लेकर अलग रुख पेश कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इस पूरे मामले पर राजनीतिक तस्वीर और साफ होने की संभावना है।
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