Saugata Roy Statement : Saugata Roy ने अपनी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से अलग हुए नेताओं और सांसदों पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने इस बागी गुट को ‘गद्दारों का समूह’ बताते हुए आरोप लगाया कि यह लोग पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

बागी सांसदों पर NDA के इशारे पर काम करने का आरोप
सौगत रॉय ने आरोप लगाया कि टीएमसी से अलग हुए सांसद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के इशारे पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह समूह पार्टी के खिलाफ साजिश रच रहा है और बाहरी राजनीतिक ताकतों के प्रभाव में निर्णय ले रहा है। उनके अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम पार्टी की एकता को कमजोर करने की कोशिश है।

‘दो टीमें’ बताकर टीएमसी और बागियों में विभाजन
अपने बयान में रॉय ने पार्टी के भीतर चल रहे विवाद को दो हिस्सों में बांटा। उन्होंने कहा कि एक टीम तृणमूल कांग्रेस की है और दूसरी ‘गद्दारों की टीम’ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि टीएमसी का नेतृत्व पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कर रही हैं और पार्टी विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन का हिस्सा है। वहीं दूसरी ओर बागी गुट को उन्होंने पूरी तरह अलग खड़ा बताया।
चुनाव चिह्न और नेतृत्व को लेकर तीखी टिप्पणी
रॉय ने तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न ‘जोड़ा फूल’ का जिक्र करते हुए कहा कि यह जनता के बीच लोकप्रिय है और असली टीएमसी का प्रतीक है। इसके विपरीत उन्होंने बागी गुट पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी टीम का चुनाव चिह्न ‘कलम की निब’ से जुड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि एक तरफ ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी है, जबकि दूसरी ओर विपक्षी और अलग विचारधारा वाला समूह खड़ा है।
NDA और विपक्षी राजनीति पर गंभीर आरोप
सौगत रॉय ने यह भी आरोप लगाया कि बागी गुट भारतीय जनता पार्टी और एनडीए के साथ मिलकर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह समूह विपक्षी राजनीति को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। उनके अनुसार, टीएमसी की असली टीम जनता के समर्थन के साथ आगे बढ़ रही है, जबकि दूसरी टीम बाहरी ताकतों के प्रभाव में है।
41 प्रतिशत वोट शेयर और चुनावी प्रदर्शन का दावा
रॉय ने पश्चिम बंगाल में टीएमसी के हालिया प्रदर्शन का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी को लगभग 41 प्रतिशत वोट मिले हैं। उन्होंने दावा किया कि यह तब संभव हुआ जब भाजपा पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग के आरोप लगे थे। उनके अनुसार, सभी दबावों और राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद टीएमसी ने मजबूत जनसमर्थन बनाए रखा है।
NCPI विलय विवाद और राजनीतिक प्रतिक्रिया
बागी गुट द्वारा नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय की घोषणा पर भी सौगत रॉय ने आपत्ति जताई। उन्होंने बताया कि यह पार्टी वर्ष 2023 में चुनाव आयोग में पंजीकृत हुई थी। रॉय ने इस कदम को भी राजनीतिक रूप से संदिग्ध बताया और कहा कि यह निर्णय टीएमसी के खिलाफ रणनीतिक चाल का हिस्सा हो सकता है।











