Shiv Sena UBT Crisis: महाराष्ट्र के राजनैतिक गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। राज्य में एक बार फिर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट को बहुत बड़ा और ऐतिहासिक झटका लगा है। राजनैतिक सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, उद्धव ठाकरे नीत पार्टी के कुल नौ लोकसभा सांसदों में से छह सांसदों ने एक साथ बगावत का बिगुल फूंक दिया है। इन सभी बागी सांसदों ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली वास्तविक ‘शिवसेना’ को अपना पूर्ण समर्थन देने का मन बना लिया है और वे उनके खेमे में शामिल होने जा रहे हैं। इस बड़े घटनाक्रम के बाद महाविकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट में भारी खलबली मच गई है।

जानिए किन-किन सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में जाने की है तेज चर्चा
शिवसेना (UBT) को छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ जाने वाले जिन छह प्रमुख सांसदों के नामों की राजनीतिक हलकों में पुरजोर चर्चा हो रही है, उनमें कई कद्दावर चेहरे शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस बागी फेहरिस्त में सांसद संजय जाधव, संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टिकर, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और मुंबई से सांसद संजय दीना पाटिल का नाम मुख्य रूप से शामिल बताया जा रहा है। इन बड़े नेताओं के पाला बदलने की अटकलों ने महाराष्ट्र की पूरी कानून-व्यवस्था और राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया है।

संजय राउत ने बागी सांसदों को दी खुली चुनौती, कहा- हिम्मत है तो इस्तीफा दें
दूसरी तरफ, बुधवार 17 जून को उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) में दोबारा बड़ी फूट पड़ने की अटकलें तेज होने के बीच पार्टी के मुख्य प्रवक्ता और राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने मीडिया के सामने आकर बागी होने वाले सांसदों को खुलेआम चुनौती दी। राउत ने नई दिल्ली में आयोजित एक आपातकालीन प्रेस वार्ता में तीखे लहजे में कहा कि ‘अगर किसी भी सांसद को पाला बदलना है या गद्दारी करनी है, तो वे सबसे पहले अपने सांसद पद से इस्तीफा दें और फिर जनता के बीच जाएं।’ राउत ने चेतावनी दी कि यदि साल 2022 की तरह पार्टी को फिर से धोखे से तोड़ने की कोशिश की गई, तो इस बार महाराष्ट्र की जागरूक जनता और शिवसेना (UBT) के वफादार कार्यकर्ता चुप नहीं बैठेंगे।
राउत की दिल्ली प्रेस कॉन्फ्रेंस में केवल तीन वफादार सांसद ही पहुंचे
इस पूरे सियासी ड्रामे के बीच सबसे दिलचस्प बात यह रही कि जब संजय राउत ने दिल्ली में अपनी शक्ति दिखाने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई, तो वहां पार्टी के कुल नौ लोकसभा सदस्यों में से केवल तीन सांसद ही मौजूद रहे। राउत के साथ मंच पर दक्षिण मुंबई के सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे ही खड़े दिखाई दिए, जिसने बगावत की खबरों को और अधिक हवा दे दी। राउत ने भावुक होते हुए कहा कि उद्धव ठाकरे और शिवसेना के जमीनी कार्यकर्ताओं ने इन सभी सांसदों को जिताने के लिए दिन-रात खून-पसीना एक किया था, ऐसे में इनके द्वारा पार्टी छोड़ना पीठ में छुरा घोंपने जैसा है।
15-15 करोड़ रुपये में सांसदों को खरीदने का लगाया बड़ा आरोप
संजय राउत ने हालांकि यह भी स्पष्ट किया कि शिवसेना (UBT) के केंद्रीय कार्यालय के पास अभी तक किसी भी सांसद के पार्टी छोड़ने की कोई आधिकारिक या लिखित जानकारी नहीं आई है। परंतु, उन्होंने सत्तारूढ़ गठबंधन पर करारा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के विपक्षी सांसदों को डरा-धमकाकर और लालच देकर प्रति सांसद 15 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि में खरीदा जा रहा है। राउत ने लोकतंत्र पर चिंता जताते हुए अंत में कहा कि यदि केंद्रीय एजेंसियों और धनबल के दम पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना (UBT) जैसे मजबूत क्षेत्रीय दलों को इसी तरह बार-बार तोड़ा जाता रहेगा, तो देश में चुनाव कराने का कोई औचित्य ही नहीं रह जाता है।

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