US Iran Peace Agreement : ईरान-अमेरिका शांति समझौते पर वेंस की दो टूक, इजरायली नेताओं को दी कड़ी चेतावनी

ईरान और अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक समझौते ने इजरायल के साथ वाशिंगटन के दशकों पुराने संबंधों में दरार ला दी है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इजरायली मंत्रियों की तीखी आलोचना करते हुए उन्हें ‘हकीकत का सामना’ करने की चेतावनी दी है। क्या यह समझौता इजरायल की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है?

US Iran Peace Agreement : अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में संपन्न हुए ऐतिहासिक शांति समझौते ने मध्य-पूर्व में हलचल पैदा कर दी है। लंबे समय से जारी संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से किए गए इस समझौते का उद्देश्य स्थिरता लाना है, लेकिन इजराइल के कुछ प्रमुख नेता इसे अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मान रहे हैं। इस डील की तीखी आलोचना करने वाले इजराइली नेताओं को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कड़ा जवाब दिया है। वेंस ने साफ शब्दों में कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी हर समस्या का समाधान केवल सैन्य कार्रवाई या ‘मार-काट’ से नहीं निकाला जा सकता।

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जेडी वेंस की इजराइली मंत्रियों को दो टूक

एक हालिया इंटरव्यू में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर और वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच की टिप्पणियों की कड़ी आलोचना की। वेंस ने सवाल किया कि उनकी दीर्घकालिक योजना क्या है? उन्होंने कहा, “आप 90 लाख की आबादी वाला देश हैं और आप हर सुरक्षा समस्या का समाधान केवल लोगों को मारकर नहीं कर सकते।” वेंस के अनुसार, इजराइल में मची यह खलबली अविश्वास का परिणाम है, जबकि अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपने प्रयासों से भरोसा कायम किया है। उन्होंने इस समझौते का पुरजोर बचाव करते हुए कहा कि कूटनीति ही आगे का रास्ता है।

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डील को लेकर इजराइल की सुरक्षा चिंताएं

भले ही अमेरिका इस समझौते को शांति की ओर एक बड़ा कदम बता रहा है, लेकिन इजराइली आलोचकों का तर्क है कि यह डील ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को नियंत्रित करने में विफल रही है। साथ ही, समझौते में ईरान के परमाणु ठिकानों को निष्क्रिय करने के लिए कोई ठोस रणनीति नहीं दिखती, जो इजराइल के लिए सबसे बड़ा चिंता का विषय है। इसके अतिरिक्त, आलोचकों का मानना है कि यह समझौता हिज्बुल्लाह के खिलाफ इजराइल के सैन्य अभियानों को सीमित करता है, जिससे उत्तरी सीमा पर सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। हाल ही में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने भी इजराइल को लेबनान में अधिक संयम बरतने की सलाह दी थी।

नेतन्याहू का संकल्प: सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी

इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने समझौते के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में एक संतुलित लेकिन दृढ़ रुख अपनाया है। उन्होंने अमेरिका के साथ संबंधों की सराहना की, लेकिन साथ ही इजराइल की सुरक्षा प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया। नेतन्याहू ने दोहराया कि उनका मुख्य लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है और इसके लिए इजराइल किसी भी हद तक जाने को तैयार है। उन्होंने उत्तरी सीमाओं की सुरक्षा के लिए दक्षिणी लेबनान में ‘सिक्योरिटी ज़ोन’ बनाए रखने पर जोर दिया और कहा कि जब तक इजराइल की राष्ट्रीय सुरक्षा इसकी मांग करती है, तब तक वहां से सेना को हटाना संभव नहीं है। आने वाले समय में इजराइल के लिए अपने सुरक्षा हितों और अमेरिकी दोस्ती के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी।

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Chandan Das

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