ECINET Portal : चुनाव आयोग ने अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म ECI NET को लेकर सामने उठे सवालों पर स्पष्टीकरण जारी किया है। आयोग ने कहा है कि ECI NET एक विकेंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे चुनाव से जुड़े मौजूदा कानूनों और आयोग द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप विकसित किया गया है। आयोग के मुताबिक, प्लेटफॉर्म का संचालन इस तरह किया गया है कि कानून के तहत जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका और अधिकार बरकरार रहें।
RPA 1950 और 1951 के तहत तैयार हुआ प्लेटफॉर्म
चुनाव आयोग के अनुसार, ECI NET को जनप्रतिनिधित्व कानून, 1950 और जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 के प्रावधानों के साथ-साथ चुनाव संबंधी नियमों और आयोग के निर्देशों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न डिजिटल सिस्टम और एप्लीकेशन को एकीकृत मंच उपलब्ध कराना है। आयोग का कहना है कि यह व्यवस्था चुनाव प्रबंधन को डिजिटल तरीके से संचालित करने के लिए बनाई गई है।
BLO से CEO तक अधिकारियों को यूनिक एक्सेस
आयोग ने बताया कि कानून के तहत जिन अधिकारियों को चुनाव संबंधी विशेष जिम्मेदारियां दी गई हैं, वे ECI NET पर अपने निर्धारित कार्य कर सकते हैं। इनमें बूथ लेवल ऑफिसर (BLO), असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (AERO), इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO), डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर (DEO) और चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर (CEO) शामिल हैं। इन अधिकारियों को अपने यूनिक आईडी और पासवर्ड के जरिए संबंधित कार्यों तक पहुंच मिलती है।
किसी दूसरे अधिकारी को वैधानिक काम करने की अनुमति नहीं
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि कानून के तहत किसी अधिकारी को सौंपे गए वैधानिक कार्य ECI NET पर कोई दूसरा व्यक्ति नहीं कर सकता। आयोग के अनुसार, यहां तक कि चुनाव आयोग का कोई अन्य अधिकारी भी संबंधित वैधानिक अधिकारी की जगह उस कार्य को सिस्टम पर पूरा नहीं कर सकता। आयोग ने इसे ECI NET की कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है।
मीडिया रिपोर्ट के बाद सामने आया स्पष्टीकरण
ECI NET को लेकर आयोग की सफाई एक मीडिया रिपोर्ट के बाद सामने आई है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में चुनाव आयोग के भीतर ECI NET और ERO NET के जरिए चुनावी डेटा तथा मतदाता सूची से जुड़े कार्यों के कथित केंद्रीकरण को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की चिंताओं का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट में सिस्टम के संचालन और अधिकारियों के अधिकारों से संबंधित सवाल उठाए जाने की बात कही गई थी।
मतदाता डेटा में बदलाव के अधिकार पर सवाल
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्तों की ओर से यह सवाल उठाया गया था कि जमीनी स्तर पर कानून के तहत जिम्मेदार ERO, DEO और CEO को डिजिटल सिस्टम पर अपने वैधानिक अधिकारों के अनुरूप पूरा एक्सेस मिल रहा है या नहीं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि मतदाता डेटाबेस में किसी तरह का बदलाव करने की क्षमता संबंधित वैधानिक अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में ही रहनी चाहिए।
IT सिस्टम के ऑडिट को लेकर भी चिंता
रिपोर्ट में चुनाव आयोग के भीतर IT सिस्टम के ऑडिट और डिजिटल प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली से जुड़ी चिंताओं का भी जिक्र किया गया था। इसमें यह सुनिश्चित करने की जरूरत बताई गई थी कि डिजिटल सिस्टम किसी वैधानिक अधिकारी को कानून के तहत मिले अधिकारों के इस्तेमाल से सीमित न करे। इन सवालों के बीच आयोग ने अब ECI NET की संरचना और अधिकारियों की भूमिका को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट किया है।
साइबर सुरक्षा की जिम्मेदारी चुनाव आयोग के पास
चुनाव आयोग ने कहा है कि ECI NET की साइबर सुरक्षा की जिम्मेदारी आयोग के पास है। आयोग के मुताबिक, विधानसभा चुनावों की मतगणना के दिन ECI NET को निशाना बनाकर करीब 68 लाख साइबर अटैक के प्रयास किए गए थे। आयोग का दावा है कि उसकी साइबर सुरक्षा व्यवस्था ने इन प्रयासों को सफल होने से रोक दिया।
क्या है ECI NET और क्यों महत्वपूर्ण है?
ECI NET चुनाव आयोग का एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसका उद्देश्य चुनाव से संबंधित विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म और एप्लीकेशन को एक व्यवस्था के तहत लाना है। आयोग के अनुसार, इसे संविधान, जनप्रतिनिधित्व कानून 1950 और 1951 तथा चुनाव से जुड़े नियमों के अनुरूप विकसित किया गया है।
अब विवाद का मुख्य मुद्दा क्या है?
फिलहाल ECI NET को लेकर चर्चा का मुख्य विषय यह है कि कानून के तहत जिन चुनाव अधिकारियों को विशेष जिम्मेदारियां और अधिकार दिए गए हैं, उनके वैधानिक अधिकार और डिजिटल सिस्टम पर उपलब्ध वास्तविक एक्सेस के बीच कोई अंतर है या नहीं। चुनाव आयोग ने अपने स्पष्टीकरण में कहा है कि वैधानिक कार्य करने का अधिकार संबंधित अधिकृत अधिकारियों के पास ही रहता है और ECI NET इसी व्यवस्था के अनुरूप काम करता है।
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