COVID Investigation : अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर के पद से इस्तीफा देने से ठीक पहले तुलसी गबार्ड ने एक बेहद सनसनीखेज खुलासा किया है। गबार्ड ने कई ऐसे गोपनीय दस्तावेज और बातचीत के ब्योरे सार्वजनिक किए हैं, जो कोविड-19 की उत्पत्ति और उस समय की नीतियों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाते हैं। अपने कार्यकाल के आखिरी दिन जारी इन फाइलों के माध्यम से उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति के पूर्व मुख्य चिकित्सा सलाहकार डॉ. एंथनी फाउची की भूमिका पर कड़े प्रहार किए हैं। गबार्ड का दावा है कि ये दस्तावेज ‘पारदर्शिता एजेंडा’ के तहत एक साल तक चली गहन समीक्षा का परिणाम हैं, जो अब तक आम जनता की पहुंच से दूर रखे गए थे।

डॉ. फाउची पर ‘गेन-ऑफ-फंक्शन’ रिसर्च को फंडिंग का आरोप
तुलसी गबार्ड ने आरोप लगाया है कि डॉ. एंथनी फाउची ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्شियस डिजीज (NIAID) का प्रमुख रहते हुए, वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में ‘गेन-ऑफ-फंक्शन’ रिसर्च के लिए अमेरिकी करदाताओं के धन का भारी मात्रा में उपयोग किया। गबार्ड के अनुसार, इस शोध का सीधा संबंध चमगादड़ के कोरोनावायरस से था। उन्होंने यह भी दावा किया कि डॉ. फाउची ने न केवल इस फंडिंग का समर्थन किया, बल्कि वायरस के लैब से लीक होने की संभावनाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों को दबाने के लिए इंटेलिजेंस समुदाय के कुछ प्रभावशाली लोगों के साथ मिलकर काम किया। उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 में शपथ लेने के बाद फाउची ने कांग्रेस के समक्ष भी इस विषय पर गलत जानकारी दी थी।

‘डीप स्टेट’ की चालों और जवाबदेही पर उठाया सवाल
गबार्ड ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस पूरी कार्रवाई को ‘डीप स्टेट’ की रणनीति करार दिया है। उन्होंने कहा कि सालों तक चले झूठ और सेंसरशिप के बाद अमेरिकी नागरिक अब पूरी सच्चाई जानने के हकदार हैं। उनके अनुसार, डॉ. फाउची जैसे राजनीतिक रूप से प्रेरित अधिकारियों ने अपने सत्ता के दुरुपयोग और गलतियों को छिपाने के लिए इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स में हेरफेर किया। उन्होंने कहा कि इन अधिकारियों ने देश को सुरक्षित रखने के बजाय अपनी गलतियों को छिपाने को प्राथमिकता दी, जिससे राष्ट्रपति की स्थिति भी कमजोर हुई। गबार्ड ने स्पष्ट किया कि व्हिसलब्लोअर्स ने भी यह बयान दिया है कि जो कोई भी आधिकारिक आकलन को चुनौती देता था, उसे बदले की कार्रवाई का सामना करना पड़ता था।
120 से अधिक बायोलॉजिकल लैब और वैश्विक फंडिंग का दावा
यह खुलासा गबार्ड की 12 जून की उस घोषणा के बाद आया है, जिसमें उन्होंने 30 से अधिक देशों में 120 से अधिक अमेरिकी-फंडेड बायोलॉजिकल लैब के होने का दावा किया था। इनमें यूक्रेन की लैब भी शामिल हैं। गबार्ड का कहना है कि इन लैब में खतरनाक पैथोजन और ‘गेन-ऑफ-फंक्शन’ जैसी संवेदनशील रिसर्च की जा रही थी, जिसकी जानकारी जनता से पूरी तरह छिपाई गई थी। गौरतलब है कि तुलसी गबार्ड ने 22 मई को अपने पति के स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि उनके पति अब्राहम एक दुर्लभ प्रकार के बोन कैंसर से जूझ रहे हैं, जिसके कारण उन्हें परिवार के साथ समय बिताने के लिए यह कठिन निर्णय लेना पड़ा है।
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