Delimitation Bill : संसद में जारी राजनीतिक गतिरोध को समाप्त करने के प्रयासों के तहत केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच संवाद का दौर तेज हो गया है। इसी कड़ी में संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बीच लंबी बैठक हुई। सूत्रों के अनुसार इस मुलाकात में संसद का विशेष सत्र बुलाने और परिसीमन बिल पर चर्चा कराने की संभावनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक इस बैठक या विशेष सत्र को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

15 अगस्त के बाद विशेष सत्र बुलाने की संभावना
सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार 15 अगस्त के बाद संसद का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रही है। बताया जा रहा है कि यह विशेष सत्र 16 से 18 अगस्त के बीच आयोजित किया जा सकता है। इस दौरान सरकार की प्राथमिकता परिसीमन बिल पर व्यापक चर्चा कराने और आवश्यक समर्थन मिलने पर इसे पारित कराने की होगी। हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय और औपचारिक घोषणा अभी बाकी है।

राजनीतिक दलों से सहमति बनाने में जुटी सरकार
सूत्रों का कहना है कि सरकार इस महत्वपूर्ण विधेयक को लेकर अधिक से अधिक राजनीतिक दलों का समर्थन हासिल करना चाहती है। इसी उद्देश्य से विभिन्न दलों के नेताओं से लगातार संपर्क किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि संविधान संशोधन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर व्यापक राजनीतिक सहमति बनाना आवश्यक है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का संवैधानिक या राजनीतिक विवाद न उत्पन्न हो।
विपक्ष से संवाद की जिम्मेदारी कई मंत्रियों को
सूत्रों के अनुसार संसद में गतिरोध समाप्त कराने के लिए अलग-अलग केंद्रीय मंत्रियों को विपक्षी दलों से बातचीत की जिम्मेदारी सौंपी गई है। किरेन रिजिजू को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से संवाद का दायित्व दिया गया है। वहीं केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी, पीयूष गोयल, अर्जुन राम मेघवाल और एस. मुरुगन को अन्य विपक्षी दलों के नेताओं से बातचीत कर समर्थन जुटाने की जिम्मेदारी दी गई है। माना जा रहा है कि सरकार इस प्रक्रिया के जरिए संसद में सहमति का माहौल बनाना चाहती है।
एफसीआरए संशोधन विधेयक भी अगले सप्ताह हो सकता है पेश
परिसीमन बिल के अलावा सरकार अगले सप्ताह Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 यानी एफसीआरए संशोधन विधेयक, 2026 भी संसद में पेश करने की तैयारी कर रही है। यह विधेयक विदेशी अंशदान से जुड़े मौजूदा कानून में संशोधन का प्रस्ताव लेकर आएगा। हालांकि इस विधेयक और विशेष सत्र के एजेंडे को लेकर सरकार की ओर से अभी तक कोई औपचारिक जानकारी साझा नहीं की गई है।

परिसीमन बिल पर कांग्रेस का विरोध बरकरार
कांग्रेस ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वह परिसीमन बिल का समर्थन नहीं करेगी। संसद के मानसून सत्र से पहले हुई कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में पार्टी ने निर्णय लिया था कि यदि सरकार यह विधेयक संसद में लाती है तो उसका विरोध किया जाएगा। ऐसे में सरकार के लिए विपक्ष का समर्थन जुटाना आसान नहीं माना जा रहा है।
क्या है परिसीमन बिल और क्यों है अहम
परिसीमन बिल का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों का पुनर्निर्धारण करना है। सरकार महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की दिशा में आवश्यक संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करने के लिए सांसदों और विधायकों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव लेकर आना चाहती है। प्रस्तावित संशोधन के तहत लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़ाकर 850 किए जाने का प्रावधान है। इनमें 815 सीटें राज्यों और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए निर्धारित होंगी। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है। यदि यह विधेयक संसद से पारित होता है तो देश की संसदीय संरचना और निर्वाचन व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
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