Maharashtra Politics : महाराष्ट्र की राजनीति में जुबानी जंग नए चरम पर पहुँच गई है। भाजपा नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नितेश राणे ने शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) पर तीखा हमला बोलते हुए आदित्य ठाकरे की तुलना तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी से की है। राणे ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि जिस तरह अभिषेक बनर्जी की वजह से टीएमसी में आंतरिक कलह और फूट देखने को मिली, ठीक उसी तरह आदित्य ठाकरे के प्रभाव के कारण उद्धव ठाकरे की शिवसेना आज बिखर रही है। उन्होंने आगे कहा कि चूंकि अभिषेक बनर्जी को अपनी सुरक्षा के लिए हेलमेट पहनकर सार्वजनिक कार्यक्रमों में घूमना पड़ता है, इसलिए वे आदित्य ठाकरे को भी एक हेलमेट उपहार स्वरूप भेज रहे हैं। राणे का तंज यहीं नहीं रुका; उन्होंने कहा कि पता नहीं कब और कहां से आदित्य ठाकरे पर जनता के गुस्से का इजहार ‘चप्पल या अंडे’ के रूप में हो जाए।

कांग्रेस से बढ़ती नजदीकियां: बगावत का असली कारण
नितेश राणे ने शिवसेना (यूबीटी) में हुई बगावत के पीछे के मुख्य कारणों का खुलासा करते हुए दावा किया कि पार्टी नेतृत्व का कांग्रेस के साथ वैचारिक और राजनीतिक जुड़ाव ही इस फूट की जड़ है। राणे के अनुसार, उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना का झुकाव कांग्रेस की ओर बहुत अधिक बढ़ गया था, और ऐसी चर्चाएं थीं कि पार्टी का अंततः कांग्रेस में विलय हो सकता है। राणे ने कहा कि उद्धव खेमे के कई सांसद इस बदलाव को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे। उन्होंने बालासाहेब ठाकरे के पुराने सिद्धांतों का हवाला देते हुए कहा कि हिंदू हृदय सम्राट बालासाहेब अक्सर कहा करते थे कि जिस दिन शिवसेना कांग्रेस के साथ जाएगी, उस दिन वे अपनी ‘दुकान’ (पार्टी) बंद कर देंगे। बागी सांसदों का तर्क है कि वे बालासाहेब की उसी प्रखर विचारधारा से बंधे हुए हैं, जिसे नेतृत्व ने छोड़ दिया है।

आदित्य ठाकरे का पलटवार: ‘गंदी राजनीति’ और ‘बिकने’ का आरोप
नितेश राणे के आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आदित्य ठाकरे ने बागी नेताओं और उनके समर्थकों पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने इसे महाराष्ट्र की ‘गंदी राजनीति’ का एक शर्मनाक उदाहरण करार दिया। आदित्य ठाकरे ने कहा, “ये एहसान-फरामोश और भ्रष्ट लोग, जो कुछ खास लोगों की बदौलत चुनाव जीते थे, आज उन्हीं के साथ गद्दारी कर रहे हैं।” उन्होंने बागी नेताओं को खुली चुनौती देते हुए कहा कि वे चाहे कितने भी बहाने बनाएं, लेकिन सच यह है कि उन्होंने बेशर्मी के साथ खुद को बेच दिया है। आदित्य ने आगे कहा कि इन नेताओं ने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए न केवल अपना नाम, बल्कि अपने परिवार की प्रतिष्ठा को भी दांव पर लगा दिया है। उन्होंने विश्वास जताया कि महाराष्ट्र की जनता इस अवसरवाद को कभी स्वीकार नहीं करेगी।
अंधेरे के खिलाफ ‘मशाल’ और भविष्य की राजनीतिक दिशा
आदित्य ठाकरे ने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा कि महाराष्ट्र के राजनीतिक परिदृश्य पर छाए इस अंधेरे को मिटाने के लिए शिवसेना (यूबीटी) की ‘मशाल’ ही एकमात्र प्रकाश का स्रोत है। उन्होंने दावा किया कि जो लोग पार्टी छोड़ कर गए हैं, वे अंततः जनता के बीच बेनकाब होंगे। यह राजनीतिक घमासान स्पष्ट करता है कि शिवसेना का विभाजन केवल दो गुटों की लड़ाई नहीं, बल्कि विचारधाराओं का एक ऐसा टकराव बन गया है, जो आने वाले समय में राज्य के चुनावी समीकरणों को पूरी तरह बदलने वाला है। नितेश राणे के बयानों और आदित्य ठाकरे के आक्रामक तेवर ने साफ कर दिया है कि शिवसेना के दोनों धड़ों के बीच का यह संघर्ष अब और भी अधिक व्यक्तिगत और तीखा होने वाला है।
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