Maharashtra Politics : शिवसेना की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर गोरेगांव के एनईएससीओ सेंटर में आयोजित भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि शिवसेना केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक विचार और आंदोलन है। उन्होंने उद्धव ठाकरे का नाम लिए बिना उन पर तीखा हमला करते हुए कहा कि केवल नाम के आगे-पीछे ‘ठाकरे’ लगा लेने या किसी से पारिवारिक रिश्ता बता देने से कोई बालासाहेब ठाकरे का वारिस नहीं बन जाता। शिंदे के अनुसार, शिवसेना के विचारों के सच्चे वारिस केवल वे शिवसैनिक हैं जिन्होंने जमीन पर संघर्ष किया है। उन्होंने शिवसेना को एक ‘भगवा तूफान’ बताते हुए कहा कि सत्ता और कुर्सी के लोभ में जिन्होंने हिंदुत्व के विचारों से समझौता किया, उन्हें जनता ने पूरी तरह नकार दिया है।

हिंदुत्व और बालासाहेब के विचारों की रक्षा का संकल्प
एकनाथ शिंदे ने आरोप लगाया कि सत्ता के लालच में बालासाहेब के विचारों को ताक पर रख दिया गया। उन्होंने याद दिलाया कि बालासाहेब ने अपने जीवनकाल में जो संघर्ष किए, उनके जाने के बाद कुछ लोगों ने महज कुर्सी के लिए उन आदर्शों को ही त्याग दिया। शिंदे ने कहा कि हमारी शिवसेना आज भी उसी हिंदुत्व, बालासाहेब के विचारों और मराठी अस्मिता की ध्वजवाहक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिवसैनिक ही पार्टी की असली ताकत हैं और इन्हीं के दम पर हम छत्रपति शिवाजी महाराज के आदर्शों का पालन करते हुए जनता की सेवा कर रहे हैं। उनके लिए राजनीति का अर्थ केवल सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि पीड़ितों और जरूरतमंदों का कल्याण करना है।

महायुति की मजबूती: ‘विपक्ष की दरार पैदा करने की साजिशें नाकाम’
महायुति गठबंधन की मजबूती पर चर्चा करते हुए शिंदे ने कहा कि गठबंधन के दलों के बीच का तालमेल निरंतर गहरा हो रहा है। उन्होंने उन अफवाहों को सिरे से खारिज किया जो उनके और देवेंद्र फडणवीस के बीच मतभेद पैदा करने की कोशिश करती हैं। शिंदे ने कहा कि हम एक टीम के रूप में काम कर रहे हैं और हमारा साझा एजेंडा केवल महाराष्ट्र की प्रगति है। उन्होंने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कुछ लोग चुगली कर दरार डालने का प्रयास करते हैं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिलेगी। शिंदे ने अपने ढाई साल के कार्यकाल की तुलना पूर्ववर्ती सरकार से करते हुए कहा कि पहले विकास की राह में ‘ब्रेक’ लगा हुआ था, जबकि अब हमने ‘एक्सेलरेटर’ दबा दिया है, जिससे विकास की गाड़ी बुलेट ट्रेन की रफ्तार से दौड़ रही है।
‘लाडकी बहिण योजना’ पर वचन: यह कभी बंद नहीं होगी
अपने कल्याणकारी कार्यों का उल्लेख करते हुए एकनाथ शिंदे ने ‘मुख्यमंत्री लाडकी बहिण योजना’ को अपना सबसे महत्वपूर्ण निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं गरीबी देखी है और घर चलाने के लिए अपनी माँ व पत्नी का संघर्ष करीब से महसूस किया है। उन्होंने वादा किया कि चाहे कोई भी सत्ता में आए, यह योजना कभी बंद नहीं होगी—यह एकनाथ शिंदे का वचन है। उन्होंने कहा कि इस योजना को रोकने की तमाम कोशिशों को जनता ने नाकाम कर दिया है। अंत में, उन्होंने स्पष्ट किया कि वे शिवाजी महाराज की सीख के अनुसार पीड़ित वर्ग की सेवा के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहेंगे और महाराष्ट्र को समृद्धि की नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।
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