Petrol Diesel Price : होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से कच्चे तेल में उछाल, जानें पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट

Petrol Diesel Price : ग्लोबल ऑयल मार्केट में एक बार फिर भारी हलचल देखने को मिल रही है। ईरान द्वारा दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्ग ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) को दोबारा बंद किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेजी आ गई है। ईरान ने इजरायल और अमेरिका पर अंतरिम शांति समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है, जिसके चलते इस अहम जलडमरूमध्य पर आवाजाही ठप हो गई है। वैश्विक पेट्रोलियम व्यापार का लगभग 20% हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है, ऐसे में इस पाबंदी ने पूरी दुनिया में आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) बाधित होने का गंभीर संकट पैदा कर दिया है।

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भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत, रेट स्थिर

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस तनावपूर्ण स्थिति के बावजूद, भारतीय उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि देश में पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। आज यानी 22 जून 2026 को भी सरकारी तेल कंपनियों ने घरेलू बाजार में कीमतें स्थिर रखी हैं। देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध है। वहीं, मुंबई, हैदराबाद, कोलकाता और बेंगलुरु जैसे महानगरों में पेट्रोल अब भी 110 रुपये प्रति लीटर के स्तर से ऊपर बना हुआ है। ज्ञात हो कि भारत में ईंधन की कीमतों में अंतिम बदलाव 25 मई को हुआ था, जिसके बाद से दरें यथावत हैं।

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ब्रेंट और WTI क्रूड की कीमतों में भारी उछाल

होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने का सीधा असर कच्चे तेल की बेंचमार्क कीमतों पर दिखा है। सोमवार के कारोबार में ब्रेंट क्रूड 54 सेंट यानी 0.67 फीसदी की वृद्धि के साथ 81.11 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो सत्र के दौरान 82.30 डॉलर तक भी गया था। इसी तरह, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड में 2.64 फीसदी का बड़ा उछाल दर्ज किया गया, जिससे यह 78.62 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते राजनयिक तनाव और शांति समझौते को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता ने तेल की कीमतों को और अधिक अस्थिर बना दिया है।

कैसे तय होती है भारत में ईंधन की कीमतें?

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें तय करने की प्रक्रिया काफी जटिल है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय बाजार के कच्चे तेल के दाम और डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की मजबूती का सीधा असर पड़ता है। सरकारी तेल कंपनियां (IOCL, BPCL, और HPCL) पिछले 15 दिनों के अंतरराष्ट्रीय औसत मूल्य और विनिमय दर को आधार मानकर प्रतिदिन सुबह 6 बजे कीमतों की समीक्षा करती हैं। चूंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में किसी भी तरह का उतार-चढ़ाव सीधे तौर पर आयात बिल को प्रभावित करता है।

राज्यों के बीच कीमतों में अंतर का मुख्य कारण

देश के विभिन्न शहरों में पेट्रोल-डीजल के दामों में जो अंतर दिखाई देता है, उसका प्रमुख कारण केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले अलग-अलग टैक्स हैं। केंद्र सरकार जहां एक्साइज ड्यूटी वसूलती है, वहीं राज्य सरकारें अपने स्तर पर वैट (VAT) निर्धारित करती हैं। इसके अतिरिक्त, रिफाइनरी से पंप तक परिवहन का खर्च और डीलरों का कमीशन जुड़ने के बाद अंतिम खुदरा मूल्य तय होता है। यही कारण है कि भौगोलिक स्थिति और स्थानीय कर ढांचे के अनुसार हर शहर में ईंधन की कीमतें अलग-अलग होती हैं।

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Chandan Das

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