Maharashtra Politics : महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बड़ा भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं। शिवसेना (यूबीटी) के बागी सांसदों के बाद अब पार्टी के 14 विधायकों के भी एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट के संपर्क में होने की खबरें सामने आ रही हैं। इस खबर ने उद्धव ठाकरे खेमे में खलबली मचा दी है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उद्धव ठाकरे ने आज दोपहर 2:30 बजे ‘शिवालय’ में अपने सभी विधायकों की एक आपातकालीन बैठक बुलाई है। इससे पहले दोपहर 12 बजे भी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ सेंधमारी के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई थी। पार्टी नेतृत्व के लिए यह दोहरा संकट है, जहां एक ओर उन्हें दिल्ली में बागी सांसदों को संभालना है, वहीं दूसरी ओर मुंबई में अपने विधायकों के भविष्य को लेकर चिंता सता रही है।

‘ऑपरेशन टाइगर’ की सफलता और उद्धव गुट की घटती ताकत
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का ‘ऑपरेशन टाइगर’ अब अपने निर्णायक दौर में पहुंचता दिखाई दे रहा है। अगर सूत्रों की मानें तो उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के पास महाराष्ट्र विधानसभा में कुल 20 विधायक हैं, जिनमें से 14 विधायकों के अलग गुट बनाने या शिंदे गुट में शामिल होने की चर्चाएं तेज हैं। यदि यह दांव सफल होता है, तो उद्धव ठाकरे के पास केवल 6 विधायक ही शेष बचेंगे, जो पार्टी के लिए एक बहुत बड़ा झटका होगा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सेंधमारी 1998 के बाद से ठाकरे गुट के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। बागी सांसद दिल्ली में आज एक बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकते हैं, जिससे राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

महायुति के लिए बढ़ी मजबूती, शिंदे गुट ने किया स्वागत
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना नेता दीपक केसरकर ने कहा कि यदि बागी सांसद और विधायक शिंदे गुट में शामिल होते हैं, तो इससे महायुति गठबंधन और अधिक सशक्त होगा। उन्होंने इसे केंद्र में एनडीए (NDA) सरकार को मजबूती देने वाला कदम बताया। केसरकर के अनुसार, देश के विकास और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए लोगों का समर्थन आवश्यक है। वहीं, दूसरी ओर उद्धव गुट इस पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बता रहा है।
आदित्य ठाकरे का तंज: ‘सरकार चलाने के बजाय तोड़फोड़ में जुटी भाजपा’
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए आदित्य ठाकरे ने भाजपा और शिंदे गुट पर तीखा निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि सरकार को शासन और जनहित के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन वे केवल तोड़फोड़ की राजनीति में व्यस्त हैं। आदित्य ने सवाल उठाया कि विदेश नीति, जल संकट, आंतरिक सुरक्षा और बढ़ती महंगाई जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा को न तो किसानों की फिक्र है और न ही महिलाओं की सुरक्षा की, उनका एकमात्र उद्देश्य विपक्षी दलों को कमजोर करना है। अब सभी की निगाहें दोपहर की बैठक के नतीजों और उसके बाद होने वाली राजनीतिक हलचल पर टिकी हैं।
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