TMC Crisis : पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को एक ऐतिहासिक और चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है। न्यूटाउन में आयोजित एक विशेष बैठक में तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट ने पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी को तृणमूल चेयरपर्सन के पद से हटा दिया है। इस राजनीतिक धमाके ने टीएमसी के भीतर मचे आंतरिक कलह को पूरी तरह से उजागर कर दिया है। बागी गुट ने हावड़ा सेंट्रल के विधायक अरूप रॉय को पार्टी का नया चेयरपर्सन नियुक्त करने की घोषणा की है। इस फैसले ने ममता बनर्जी के नेतृत्व को सीधे चुनौती दी है। वहीं, रिताब्रता बनर्जी और उनके साथियों के नेतृत्व वाले इस ‘असली तृणमूल’ गुट ने पार्टी के कद्दावर नेता और ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी को ‘ऑल इंडिया जनरल सेक्रेटरी’ के पद से तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है।

बजट सत्र के बाद होटल में जुटकर बागी गुट ने की बड़ी बैठक
इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की शुरुआत सोमवार को राज्य विधानसभा के बजट सत्र के समापन के बाद हुई। सत्र खत्म होते ही तृणमूल के बागी विधायकों ने न्यूटाउन के एक होटल में एक आपातकालीन बैठक बुलाई। इस बैठक की व्यापकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें तृणमूल के करीब 60 विधायक और कोलकाता के 70 से अधिक पूर्व पार्षद शामिल हुए। सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान एक 30 सदस्यीय ‘तृणमूल कमेटी’ के गठन का ऐलान किया गया। यह गुट खुद को पार्टी का असली उत्तराधिकारी बता रहा है और ममता बनर्जी के निर्णयों के खिलाफ लामबंद हो गया है।

500 नेताओं का महाजुटान और नई नेशनल वर्किंग कमेटी का गठन
तृणमूल कांग्रेस के इस ‘स्पेशल सेशन’ में राज्य भर से आए लगभग 500 नेताओं ने हिस्सा लिया, जिसमें जिला स्तर के अध्यक्षों से लेकर विधायक और पूर्व पार्षद तक शामिल थे। बैठक में कम से कम 16 जिला अध्यक्षों की उपस्थिति ने ममता खेमे के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। इस दौरान नई नेशनल वर्किंग कमेटी का गठन किया गया, जिसमें अरूप रॉय को राष्ट्रीय अध्यक्ष, संदीपन साहा, जावेद खान और रिताब्रता बनर्जी को नेशनल जनरल सेक्रेटरी और फिरहाद हकीम, अरूप बिस्वास व रथिन घोष को उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी के संविधान का हवाला देते हुए बागी गुट ने दावा किया कि उन्होंने सभी वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया है।
बैंक अकाउंट्स पर नजर और आगामी रणनीति की तैयारी
बागी गुट अब पूरी तरह से पार्टी की कमान अपने हाथों में लेने की तैयारी में है। विशेष सत्र के दौरान कानूनी विशेषज्ञों से परामर्श लिया जा रहा है कि तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक बैंक खातों का नियंत्रण कैसे अपने पास रखा जाए। बागी नेताओं का कहना है कि वे अगले 21 दिनों के भीतर सभी फ्रंटल ऑर्गेनाइजेशन का पुनर्गठन करेंगे। पार्टी के मालिकाना हक और चुनावी चिन्ह को लेकर अब कानूनी लड़ाई तेज होने की संभावना है। ममता बनर्जी के लिए यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि पार्टी के भीतर एक बड़ा वर्ग उनके खिलाफ खड़ा हो गया है, जिससे आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति में और अधिक उठापटक देखने को मिल सकती है।
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