Core Sector Growth: भारत की औद्योगिक अर्थव्यवस्था के मुख्य आधार माने जाने वाले आठ कोर सेक्टरों की विकास दर मई महीने में चिंताजनक रूप से गिरकर 0.5% (सालाना आधार पर) पर आ गई है। यह पिछले सात महीनों का न्यूनतम स्तर है। इससे पहले अप्रैल में यह दर 1.8% दर्ज की गई थी। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी इंडस्ट्रीज का कमजोर प्रदर्शन मुख्य कारण है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष यानी मई 2025 में भी इन कोर सेक्टरों की वृद्धि दर 1.2% थी, जिसके मुकाबले इस साल का प्रदर्शन और भी धीमा रहा है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि पेट्रोलियम आधारित क्षेत्रों में उत्पादन की कमी ने पूरी औद्योगिक तस्वीर को प्रभावित किया है।

पांच कोर सेक्टरों में दर्ज की गई गिरावट
मई महीने के दौरान आठ में से पांच कोर सेक्टरों के उत्पादन में नकारात्मक वृद्धि देखी गई। इसमें रिफाइनरी उत्पादों का प्रदर्शन सबसे खराब रहा, जहां 8.7% की भारी गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले 42 महीनों का सबसे निचला स्तर है। इसके अलावा, कोयला उत्पादन में 9.3%, प्राकृतिक गैस में 4.9%, कच्चा तेल उत्पादन में 4.6% और उर्वरक क्षेत्र में 0.9% की कमी आई है। विशेषज्ञ मदन सबनवीस के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आयात संबंधी चुनौतियों ने पेट्रोलियम क्षेत्र को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। वहीं, कोयला कंपनियों द्वारा इन्वेंट्री प्रबंधन के चलते उत्पादन कम करने से इस क्षेत्र में भी सुस्ती देखी गई।

संकट का असर और पश्चिम एशिया की स्थिति
इक्रा (ICRA) के प्रिंसिपल इकोनॉमिस्ट राहुल अग्रवाल के मुताबिक, रिफाइनरी क्षेत्र में आई इस गिरावट के लिए काफी हद तक पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संकट जिम्मेदार है। आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं और वैश्विक अनिश्चितता ने रिफाइनिंग गतिविधियों को धीमा कर दिया है। कच्चे तेल के उत्पादन में कमी को भी इसी संकट के परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है। हालांकि, कोयला क्षेत्र की स्थिति अलग है, जहां कंपनियां मांग के अनुसार स्टॉक को नियंत्रित करने की रणनीति अपना रही हैं।
बुनियादी ढांचा क्षेत्र से राहत और मजबूती के संकेत
गिरावट के इस माहौल में भी कुछ क्षेत्रों ने मजबूती बनाए रखी है। भीषण गर्मी के कारण बिजली की मांग में अप्रत्याशित उछाल आया है, जिससे बिजली उत्पादन 8.7% की तेजी के साथ पिछले 19 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। साथ ही, सड़कों, आवास और रेलवे जैसे बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में जारी तेजी के कारण सीमेंट और स्टील क्षेत्र में भी अच्छी वृद्धि देखी गई है। सीमेंट का उत्पादन 8.4% और स्टील का उत्पादन 5% बढ़ा है। मदन सबनवीस ने कहा कि बुनियादी ढांचा गतिविधियों में निवेश औद्योगिक विकास को सहारा देने का कार्य कर रहा है।
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) पर पड़ेगा सीधा असर
आठ कोर सेक्टर भारत के कुल औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में 40.27% का बड़ा हिस्सा (वेटेज) रखते हैं। अप्रैल में IIP वृद्धि दर 4.9% थी, लेकिन कोर सेक्टर में आई इस गिरावट के बाद मई के आंकड़ों में सुस्ती तय मानी जा रही है। बैंक ऑफ बड़ौदा ने अनुमान लगाया है कि मई के लिए IIP वृद्धि दर 1 से 1.5% के बीच रह सकती है, जबकि इक्रा ने इसे 2 से 3% रहने की उम्मीद जताई है। यह डेटा आने वाले समय में नीतिगत फैसलों के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित होगा।
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