GMC Bhavnagar Ragging Case : गुजरात के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (GMC), भावनगर से एक बेहद चौंकाने वाला और शर्मनाक मामला सामने आया है। ऑर्थोपेडिक्स विभाग के प्रथम वर्ष के रेजिडेंट डॉक्टरों ने अपने सीनियर्स पर गंभीर मानसिक और शारीरिक शोषण का आरोप लगाया है। पीड़ित छात्रों के अनुसार, सीनियर्स का टॉर्चर अब उनकी बर्दाश्त से बाहर हो गया है। छात्रों का कहना है कि उन्हें ऑपरेशन थिएटर (OT) के भीतर जबरन ‘मुर्गा’ बनाया जाता है और पूरी रात खड़ा रखा जाता है। यह मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाली घटना है, जिसने न केवल छात्रों बल्कि उनके अभिभावकों को भी गहरे सदमे में डाल दिया है।

सीसीटीवी फुटेज और चैट से हुआ खुलासा
इस वीभत्स घटना का पर्दाफाश सोशल मीडिया पर वायरल हुई कुछ तस्वीरों और व्हाट्सएप चैट्स के माध्यम से हुआ। छात्रों ने आरोप लगाया कि सीनियर्स उन्हें मानसिक तौर पर प्रताड़ित करने का कोई मौका नहीं छोड़ते। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) जूनियर डॉक्टर्स नेटवर्क के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. ध्रुव चौहान ने इस पूरे मामले को सार्वजनिक करते हुए अपनी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी फुटेज देखकर वे कुछ देर के लिए सुन्न हो गए थे। डॉ. चौहान ने उन ऑर्थोपेडिक रेजिडेंट्स की मानसिक स्थिति पर गहरी चिंता जताई, जिन्हें सबके सामने अपमानित किया गया और शारीरिक प्रताड़ना दी गई।

हर आधे घंटे में सेल्फी की जिद
पीड़ित छात्रों द्वारा साझा की गई चैट्स में प्रताड़ना की भयावहता साफ झलकती है। छात्रों ने बताया कि सीनियर्स उन्हें रात भर सोने नहीं देते थे। यह सुनिश्चित करने के लिए कि वे जाग रहे हैं या नहीं, सीनियर्स उनसे हर आधे घंटे में सेल्फी मांगते थे। यदि छात्र सेल्फी भेजने में चूक जाते, तो उन्हें अभद्र भाषा और गंभीर परिणामों की धमकी दी जाती थी। यह निरंतर निगरानी और दबाव छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित कर रहा था। इस तरह की प्रताड़ना ने चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अनुशासन के नाम पर होने वाले दुर्व्यवहार की पोल खोल दी है।
प्रशासन का सख्त रुख: 6 सीनियर डॉक्टर सस्पेंड
मामला प्रकाश में आने और सोशल मीडिया पर तूल पकड़ने के बाद कॉलेज प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से कड़ा कदम उठाया है। रैगिंग की इस घिनौनी घटना में संलिप्त पाए गए सभी 6 सीनियर डॉक्टरों को कॉलेज और अस्पताल से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया गया है। इतना ही नहीं, उन्हें तत्काल प्रभाव से हॉस्टल खाली करने का निर्देश भी दिया गया है। प्रशासन का यह कदम अन्य छात्रों के लिए एक कड़ा संदेश है कि शैक्षणिक संस्थानों में रैगिंग को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सुरक्षा व्यवस्था और रैगिंग पर बड़े सवाल
कॉलेज और विश्वविद्यालयों में रैगिंग के खिलाफ कड़े नियम और कानून होने के बावजूद, भावनगर GMC की यह घटना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। यह पहली बार नहीं है जब देश के किसी मेडिकल कॉलेज में इस तरह की घटना सामने आई हो, लेकिन इसने नए छात्रों के मन में असुरक्षा की भावना को और गहरा कर दिया है। सवाल यह है कि प्रशासनिक सख्ती के बावजूद सीनियर्स की हिम्मत इतनी कैसे बढ़ी? इस घटना ने एक बार फिर उच्च शिक्षण संस्थानों में रैगिंग विरोधी कमेटियों की कार्यक्षमता और निगरानी तंत्र की समीक्षा की आवश्यकता को रेखांकित किया है।
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