RAC Seat Controversy : भारतीय रेलवे में आरएसी (RAC – Reservation Against Cancellation) की सुविधा उन यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत होती है जिन्हें तत्काल यात्रा करनी होती है। रेलवे का उद्देश्य यह है कि कम से कम कोई भी यात्री यात्रा से वंचित न रहे और एक ही सीट पर दो यात्री अपना सफर तय कर सकें। लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने महिला सुरक्षा और आरएसी सीट आवंटन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक महिला यात्री ने अपनी शिकायत में कहा है कि उसे आरएसी में एक अनजान पुरुष के साथ सीट साझा करने के लिए मजबूर किया गया, जिससे वह असहज और असुरक्षित महसूस कर रही है। महिला ने टीटीई (TTE) की अनुपस्थिति और रेलवे की व्यवस्था पर कड़ी नाराजगी जताई है।

क्या जेंडर के आधार पर होती है सीट आवंटन?
रेलवे के नियमों के अनुसार, आरएसी सीट पर दो अनजान यात्री बैठ सकते हैं और इसमें जेंडर का कोई विशेष बंधन नहीं होता। आईआरसीटीसी (IRCTC) या भारतीय रेलवे की प्रणाली जेंडर के आधार पर आरएसी आवंटन को नहीं रोकती है। हालांकि, रेलवे की ओर से यह प्रयास किया जाता है कि सीट अलॉटमेंट के समय पुरुष-पुरुष या महिला-महिला को ही साथ रखा जाए, लेकिन यह कोई अनिवार्य नियम या गारंटी नहीं है। अक्सर मांग और उपलब्धता के कारण सिस्टम में इस तरह की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जो महिला यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बनती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रियों को यदि ऐसी स्थिति में आपत्ति हो, तो उन्हें तुरंत टीटीई से संपर्क करना चाहिए या 139 नंबर पर शिकायत दर्ज कर समाधान ढूंढना चाहिए।

⚠️ Woman allotted an RAC seat with an unknown male passenger.
Should Indian Railways rethink its RAC allocation system and introduce gender-sensitive seating policies?
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— Jharkhand Rail Users (@JharkhandRail) June 22, 2026
सोशल मीडिया पर बहस: अधिकार बनाम सुविधा
इस वायरल वीडियो के बाद इंटरनेट पर एक लंबी बहस छिड़ गई है। कुछ उपयोगकर्ता महिला का समर्थन करते हुए मांग कर रहे हैं कि भारतीय रेलवे को अपनी सीट आवंटन प्रणाली पर पुनर्विचार करना चाहिए और ‘लिंग-संवेदनशील’ (Gender-Sensitive) नीतियां लागू करनी चाहिए। दूसरी ओर, कुछ उपयोगकर्ताओं का तर्क है कि आरएसी एक साझा सुविधा है और हर यात्री के पास पहले से यह विकल्प होता है कि वह या तो आरएसी में यात्रा करे या टिकट कैंसिल कराकर रिफंड ले ले। कुछ लोगों ने यह भी सुझाव दिया कि रेलवे को आरएसी यात्रियों के लिए बेहतर प्रबंधन और गोपनीयता की व्यवस्था करनी चाहिए ताकि किसी भी यात्री को असुविधा न हो।
रेलवे के समक्ष बड़ी चुनौती और समाधान
‘झारखंड रेल यूजर्स’ जैसे मंचों ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए पूछा है कि क्या रेलवे की मौजूदा आवंटन प्रणाली महिलाओं की सुरक्षा और निजता के अनुकूल है? वास्तव में, यह मामला रेलवे प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है। लाखों की संख्या में प्रतिदिन यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए आरएसी जैसी व्यवस्था एक व्यावहारिक जरूरत है, लेकिन सुरक्षा और सम्मान के मुद्दे पर रेलवे को संवेदनशील होना होगा। यदि रेलवे अपनी तकनीकी प्रणाली में थोड़ा सुधार कर ‘जेंडर-आधारित फिल्टर’ को प्राथमिकता दे सके, तो ऐसी अप्रिय स्थितियों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। फिलहाल, महिला यात्रियों की सुरक्षा को लेकर उठ रहे ये सवाल रेलवे के भविष्य के सुधारों के लिए एक आईना हैं।
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