ISKCON Mid-Day Meal : बंगाल मिड-डे मील विवाद, इस्कॉन के मेन्यू से अंडे बाहर, शुभेंदु अधिकारी के फैसले पर छिड़ी बहस

ISKCON Mid-Day Meal : कोलकाता के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील (PM POSHAN) योजना में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा हाल ही में पेश किए गए बजट के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि अब शहर के लगभग 1,800 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में मिड-डे मील परोसने की जिम्मेदारी इस्कॉन (ISKCON) संभालेगा। इस बदलाव के साथ ही स्कूलों में बच्चों को परोसे जाने वाले भोजन से अंडे हटने की पूरी संभावना है। इस्कॉन की ओर से संचालित होने वाली इस योजना में आठवीं कक्षा तक के करीब 1 लाख छात्रों को पौष्टिक शाकाहारी भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।

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इस्कॉन का दावा: शाकाहारी भोजन में भी है भरपूर पोषण

इस्कॉन के वाइस-प्रेसिडेंट और प्रवक्ता राधा रमण दास ने स्पष्ट किया है कि नया मेन्यू पूरी तरह से पौष्टिक होगा, लेकिन इसमें अंडे शामिल नहीं होंगे। उन्होंने इस आम गलतफहमी को खारिज किया कि केवल अंडे ही प्रोटीन का एकमात्र अच्छा स्रोत हैं। दास के अनुसार, सोया चंक्स, राजमा, पनीर, बीन्स और विभिन्न प्रकार की दालों में प्लांट-बेस्ड प्रोटीन प्रचुर मात्रा में होता है। उन्होंने बताया कि आहार विशेषज्ञों (डायटीशियन) की देखरेख में मेन्यू तैयार किया गया है, जो बच्चों की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में सक्षम होगा। इस्कॉन पिछले दो दशकों से भारत के कई राज्यों में अपने ‘अन्नामित्र फाउंडेशन’ के जरिए सफलतापूर्वक मिड-डे मील सेवा दे रहा है।

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सरकार और समर्थकों का नजरिया

पश्चिम बंगाल के स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन ने इस्कॉन के इस कदम का समर्थन करते हुए कहा कि पोषण के लिए बच्चों को अंडे खिलाना अनिवार्य नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि दुनिया भर में करोड़ों लोग शाकाहारी भोजन ग्रहण कर स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि शाकाहारी भोजन शारीरिक विकास के लिए आवश्यक सभी तत्वों से भरपूर होता है। राज्य सरकार ने बच्चों को उच्च गुणवत्ता वाला भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ही इस नई व्यवस्था को मंजूरी दी है। आधिकारिक सूत्रों का मानना है कि इस्कॉन के बेहतर ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स की चिंताएं और अनिश्चितता

इस नई व्यवस्था के लागू होने से उन सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स (SHG) के भविष्य पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं, जो वर्तमान में स्कूलों में खाना सप्लाई कर रहे हैं। ये ग्रुप्स अब तक अलग-अलग तरह का भोजन परोसते रहे हैं, जिसमें हफ्ते में एक दिन अंडा शामिल होता था। स्थानीय स्तर पर इन रसोइयों से जुड़े लोगों ने अपनी आजीविका छिनने की आशंका जताई है। हालांकि, स्कूल प्रशासन और शिक्षा विभाग का मानना है कि यदि बच्चों को अधिक स्वच्छ और उच्च गुणवत्ता वाला भोजन मिलता है, तो यह बदलाव स्वागत योग्य है।

वर्ल्ड-क्लास सेंट्रल किचन की तैयारी

इस्कॉन ने घोषणा की है कि कोलकाता में बच्चों को गर्म और ताज़ा भोजन उपलब्ध कराने के लिए एक वर्ल्ड-क्लास, ऑटोमेटेड सेंट्रल किचन स्थापित किया जाएगा। इस्कॉन प्रवक्ता के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित करने और सही जमीन का चयन करने में लगभग एक महीने का समय लगेगा। उल्लेखनीय है कि राज्य बजट में प्राइमरी स्तर पर मिड-डे मील के लिए प्रति छात्र आवंटन राशि को 6.78 रुपये से बढ़ाकर 10 रुपये कर दिया गया है। इस्कॉन का लक्ष्य सरकार की फंडिंग के साथ-साथ अपने दानदाताओं के सहयोग से छात्रों को सर्वोत्तम गुणवत्ता वाला भोजन उपलब्ध कराना है।

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Chandan Das

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