Ukraine Indian Troops : हाल ही में प्रकाशित किताब ‘रिजीम चेंज: इनसाइड द इंपीरियल प्रेसिडेंसी ऑफ डोनाल्ड ट्रंप’ में एक बड़ा खुलासा हुआ है, जिसने अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हलचल मचा दी है। मैगी हैबरमैन और जोनाथन स्वान द्वारा लिखित इस पुस्तक के अनुसार, जनवरी 2025 में ओवल ऑफिस में आयोजित एक उच्च-स्तरीय बैठक के दौरान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए एक शांति योजना पेश की थी। इस बैठक में वेंस ने प्रस्ताव दिया था कि संघर्ष विराम सुनिश्चित करने के लिए भारतीय सैनिकों को यूक्रेन में शांति मिशन के तहत तैनात किया जा सकता है। यह बैठक डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के महज 10 दिन बाद, 30 जनवरी 2025 को हुई थी।

शांति प्रस्ताव और ट्रंप की प्रतिक्रिया
इस महत्वपूर्ण बैठक का मुख्य उद्देश्य यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिका की रणनीति तय करना था। इसमें राष्ट्रपति ट्रंप के साथ उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वाल्ट्ज समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। बैठक में रूस-यूक्रेन मामलों के विशेष दूत रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल कीथ केलॉग ने एक शांति प्रस्ताव पेश किया, जिसमें युद्धविराम की निगरानी के लिए नाटो (NATO) सदस्य देशों, जैसे ब्रिटेन, फ्रांस और नीदरलैंड की सेनाओं को तैनात करने का सुझाव दिया गया था। हालांकि, उपराष्ट्रपति वेंस ने इस पर चिंता जताई कि यूक्रेन में नाटो सैनिकों की मौजूदगी से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भड़क सकते हैं, जिससे अमेरिका के सीधे संघर्ष में घिरने का खतरा बढ़ जाएगा।

भारत के नाम पर क्यों नहीं बनी बात?
वेंस की चिंता के जवाब में, जब गैर-नाटो देशों से शांति सेना भेजने पर विचार शुरू हुआ, तो उन्होंने सऊदी अरब या भारत का सुझाव दिया। किताब के दावों के मुताबिक, जेडी वेंस का मानना था कि यूरोप से बाहर के देशों की भागीदारी इस स्थिति को संतुलित कर सकती है। हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस विचार को तुरंत खारिज कर दिया। ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारतीय नेतृत्व इस प्रस्ताव के लिए कभी तैयार नहीं होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने सौहार्दपूर्ण संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि वे जानते हैं कि भारतीय इस प्रकार के जोखिम भरे अंतरराष्ट्रीय मिशन के लिए कीमत चुकाने को तैयार नहीं होंगे। ट्रंप ने मजाक में इस सुझाव को टालते हुए कहा कि भारतीय कभी ऐसा नहीं करेंगे।
अमेरिका की भूमिका पर ट्रंप का स्पष्ट रुख
ट्रंप ने इस चर्चा के दौरान यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि ब्रिटेन या फ्रांस अपने स्वयं के प्रयासों से यूक्रेन में सैनिक तैनात करना चाहते हैं, तो उन्हें इसमें कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते अमेरिका इसमें सीधे तौर पर शामिल न हो। यह पुस्तक अमेरिका की यूक्रेन नीति और राष्ट्रपति ट्रंप के निर्णय लेने की प्रक्रिया के बारे में नई जानकारी प्रदान करती है। इस खुलासे ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका और अमेरिका की शांति योजनाओं को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं, यह स्पष्ट करते हुए कि ट्रंप के प्रशासन ने वैश्विक संघर्षों में भारत के संयमित और स्वतंत्र रुख का सम्मान किया है।











