Bihar News : बिहार के समस्तीपुर जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और शर्मनाक घटना सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। जिले के पूसा थाना क्षेत्र में एक ही परिवार के चचेरे भाई-बहन के बीच पनपे प्रेम संबंध ने उस समय एक हिंसक मोड़ ले लिया, जब वे घर से भागकर शादी के बंधन में बंध गए। करीब आठ महीने तक घर से बाहर रहने के बाद जब ये किशोर-किशोरी वापस अपने गांव लौटे, तो उन्हें सामाजिक मर्यादाओं और परंपराओं के नाम पर एक ऐसी सजा दी गई, जिसे सुनकर रूह कांप जाए। ग्रामीणों और परिजनों ने इस मामले को सुलझाने के लिए पंचायत बुलाई, लेकिन पंचायत का फैसला न्यायपूर्ण होने के बजाय पूरी तरह से अमानवीय और ‘तालिबानी’ साबित हुआ।

समाज के नाम पर बर्बरता का नंगा नाच
पंचायत में जब दोनों किशोरों से उनके निर्णय के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ एक-दूसरे के साथ रहने और जीवन बिताने की बात दोहराई। किशोरी ने बताया कि उससे उसके माता-पिता और साथी में से किसी एक को चुनने का विकल्प दिया गया था, जिस पर उसने अपने साथी का साथ देने का दृढ़ निश्चय व्यक्त किया। बस यही बात पंचायत और वहां मौजूद परिजनों को नागवार गुजरी। पंचायत का फरमान आते ही भीड़ हिंसक हो गई। कथित तौर पर दोनों का सिर मुंडवा दिया गया, उनके चेहरों पर कालिख और चूना पोतकर उन्हें पूरे गांव में अपमानित किया गया। इतना ही नहीं, बर्बरता की सारी हदें पार करते हुए दोनों की जमकर पिटाई की गई और अंततः उन्हें गांव से बाहर खदेड़ दिया गया।

अस्पताल और पुलिस की भूमिका
पिटाई और अपमान से बुरी तरह घायल अवस्था में ये दोनों किशोर समस्तीपुर सदर अस्पताल पहुंचे, लेकिन वहां भी उन्हें शांति नहीं मिली। अस्पताल में बढ़ती भीड़ और तमाशबीनों के दबाव के कारण वे वहां से भी अन्यत्र चले गए। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पीड़ितों की आयु अभी मात्र 16 से 17 वर्ष के बीच है। इस घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। पूसा थाना अध्यक्ष रमेश कुमार ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस की एक टीम तुरंत गांव पहुंची थी, लेकिन वहां किसी भी पक्ष ने पुलिस को कोई औपचारिक लिखित शिकायत नहीं दी है। पुलिस अब सदर अस्पताल के रिकॉर्ड और अन्य सूत्रों के माध्यम से दोनों की तलाश कर रही है।
कानून के दायरे में जांच और न्याय का इंतजार
पुलिस प्रशासन का कहना है कि यह मामला अत्यंत गंभीर है और स्वतः संज्ञान लेते हुए इसकी गहन जांच की जा रही है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जैसे ही पीड़ित किशोर-किशोरी पुलिस के सामने अपना बयान दर्ज कराएंगे, वैसे ही दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस की टीम गांव में मौजूद तथ्यों की पड़ताल कर रही है और उन लोगों की पहचान की जा रही है जिन्होंने पंचायत के नाम पर इस अमानवीय कृत्य को अंजाम दिया। यह घटना न केवल हमारे समाज में व्याप्त कुरीतियों और कानून को अपने हाथ में लेने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाती है, बल्कि किशोरों की सुरक्षा और उनके व्यक्तिगत अधिकारों के हनन को भी दर्शाती है। अब देखना यह है कि पुलिस इस मामले में दोषियों के खिलाफ क्या सख्त रुख अपनाती है।










