Great Nicobar Project : विपक्ष और पर्यावरण विशेषज्ञों की आलोचनाओं के बावजूद, केंद्र सरकार ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। केंद्रीय जहाजरानी और बंदरगाह मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने हाल ही में पुष्टि की है कि इस रणनीतिक परियोजना पर कार्य वर्ष 2028 से शुरू होने की प्रबल संभावना है। यह एक बहु-चरणीय परियोजना है, जिसे तीन मुख्य भागों में विभाजित किया गया है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि उन्होंने स्थानीय द्वीपवासियों से संवाद किया है और वे इस विकास कार्य को लेकर अत्यधिक उत्साहित हैं। सरकार का मानना है कि यह प्रोजेक्ट न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देगा, बल्कि अंडमान और निकोबार को भारत का एक प्रमुख सामरिक और आर्थिक केंद्र बनाएगा।

पर्यावरण संरक्षण और सरकार का दृष्टिकोण
ग्रेट निकोबार इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट प्रोजेक्ट शुरू से ही पर्यावरणीय चिंताओं के घेरे में रहा है। पर्यावरणविदों ने मुख्य रूप से लेदरबैक कछुओं के प्रजनन स्थलों और मूंगे की चट्टानों को संभावित नुकसान पर चिंता व्यक्त की है। हालांकि, सरकार ने इन आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा है कि परियोजना की योजना बनाते समय पारिस्थितिक संतुलन का पूर्ण ध्यान रखा गया है। मंत्री सोनोवाल ने आश्वासन दिया कि पर्यावरण से जुड़े सभी मुद्दों का तथ्यात्मक समाधान निकाला गया है और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इस विशाल निर्माण कार्य से प्रकृति को कोई अपूरणीय क्षति न हो।

परियोजना की विस्तृत कार्य-योजना और समय-सीमा
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट कुल 166.10 वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में फैला होगा। इसके कार्यान्वयन के लिए तीन चरण निर्धारित किए गए हैं:
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प्रथम चरण (2025-2035): यह परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण और बड़ा चरण है, जिसमें 72.12 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विकास कार्य किया जाएगा।
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द्वितीय चरण (2036-2041): इसमें 45.27 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को विकसित किया जाएगा।
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तृतीय चरण (2042-2047): यह अंतिम चरण 48.71 वर्ग किलोमीटर में फैला होगा, जिसे 2047 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
रणनीतिक और आर्थिक महत्व
यह परियोजना भारत की समुद्री ताकत को नई ऊंचाई प्रदान करेगी। ग्रेट निकोबार का स्थान ‘ईस्ट-वेस्ट’ मुख्य शिपिंग रूट से केवल 40 नॉटिकल मील दूर है, जिससे वैश्विक व्यापार में भारत की पकड़ मजबूत होगी। इसके बनने के बाद, भारत को ट्रांसशिपमेंट के लिए विदेशी बंदरगाहों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी यह परियोजना भारत के लिए गेम-चेंजर साबित होगी, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की स्थिति को और अधिक सशक्त बनाएगी।
बुनियादी ढांचे का खाका: क्या-क्या शामिल है?
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का मूल स्वरूप चार प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर स्तंभों पर टिका है:
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इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल (ICTT): 14.2 मिलियन टीईयू क्षमता वाला यह टर्मिनल हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री व्यापार का केंद्र बनेगा।
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ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट: इसकी क्षमता पीक ऑवर में 4,000 यात्रियों को संभालने की होगी।
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आधुनिक टाउनशिप: 16,610 हेक्टेयर में फैली यह टाउनशिप पर्यटन और विकास का नया केंद्र होगी।
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हाइब्रिड पावर प्लांट: 450 एमवीए क्षमता वाला यह प्लांट पूरी तरह सौर ऊर्जा और प्राकृतिक गैस जैसे स्वच्छ स्रोतों से संचालित होगा, जो पूरे प्रोजेक्ट की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करेगा।
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