Indian Air Force : पाकिस्तान द्वारा भारत के राफेल लड़ाकू विमानों को मार गिराने का दावा पूरी तरह से निराधार और मनगढ़ंत साबित हुआ है। भारतीय वायुसेना के एक हालिया आधिकारिक दस्तावेज ने पड़ोसी देश के इस सफेद झूठ की धज्जियां उड़ा दी हैं। पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मंचों और सोशल मीडिया के माध्यम से यह दुष्प्रचार फैलाया था कि उसके चीन निर्मित जे-10सी फाइटर जेट ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय राफेल विमानों को निशाना बनाया है। लेकिन भारतीय वायुसेना द्वारा जारी ताजा टेंडर ने इन सभी दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि भारत के सभी 36 राफेल विमान पूरी तरह से सुरक्षित हैं और अपनी सामरिक भूमिका का सफलतापूर्वक निर्वहन कर रहे हैं।

एयरफोर्स के नए टेंडर से सामने आई हकीकत
भारतीय वायुसेना के इंजीनियरिंग निदेशालय ने हाल ही में फ्रांस की कंपनी ‘सैफ्रान एयरक्राफ्ट इंजिन्स’ को एक ‘रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल’ (RFP) जारी किया है। 15 जून 2026 को जारी इस प्रस्ताव में भारत और फ्रांस के बीच 2016 में हुए अंतर-सरकारी समझौते के तहत खरीदे गए सभी 36 राफेल विमानों के रखरखाव, तकनीकी सहायता और उड़ानों के लॉजिस्टिक सपोर्ट के लिए एक ‘ब्रिज सपोर्ट पैकेज’ की मांग की गई है। इस दस्तावेज में यह स्पष्ट उल्लेख है कि वायुसेना इन सभी विमानों का संचालन कर रही है और सितंबर 2026 के बाद भी इनके निरंतर रखरखाव के लिए तकनीकी सहयोग आवश्यक है। यह आधिकारिक दस्तावेज इस बात का ठोस प्रमाण है कि भारत के बेड़े में शामिल सभी राफेल फाइटर जेट सुरक्षित हैं।

ऑपरेशन सिंदूर और पाकिस्तान की बौखलाहट
उल्लेखनीय है कि मई 2025 में भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को अंजाम दिया गया था। यह ऑपरेशन पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले का एक करारा जवाब था। इस सैन्य कार्रवाई के दौरान भारत ने पाकिस्तान की सीमा के भीतर घुसकर कई आतंकी ठिकानों, एयर डिफेंस सिस्टम और दर्जनों एयरबेस को पूरी तरह तबाह कर दिया था। इस जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान को भारी सैन्य और ढांचागत नुकसान उठाना पड़ा था, जिसमें सैकड़ों आतंकवादियों और पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने की खबरें थीं। पाकिस्तान की ओर से राफेल विमानों को गिराने का दावा इसी हार की हताशा और दुनिया के सामने अपनी साख बचाने की एक असफल कोशिश मात्र थी।
दुष्प्रचार की राजनीति और भारत का सामरिक जवाब
पाकिस्तान की आदत रही है कि वह अपनी सैन्य विफलता को छिपाने के लिए अक्सर झूठ का सहारा लेता है। राफेल जैसे विश्वस्तरीय विमानों के विरुद्ध किए गए दावों का उद्देश्य केवल अपने घरेलू जनता को गुमराह करना था। हालांकि, वायुसेना के इस ताजा कदम ने पाकिस्तान के इन दावों की कलई खोल दी है। भारत का यह टेंडर न केवल विमानों के रखरखाव की प्रक्रिया है, बल्कि यह एक कूटनीतिक संदेश भी है कि भारतीय वायुसेना अपनी संपत्ति की सुरक्षा और संचालन को लेकर पूरी तरह सजग है। पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा की उम्र बहुत छोटी रही और अब यह स्पष्ट है कि भारत की सामरिक शक्ति के सामने पड़ोसी देश का हर दावा केवल एक खोखली कहानी बनकर रह गया है।
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