Venezuela Earthquake Disaster : वेनेजुएला एक अभूतपूर्व और भयावह प्राकृतिक त्रासदी से जूझ रहा है। कैरिबियाई तट पर आए दो शक्तिशाली भूकंपों ने देश की नींव हिलाकर रख दी है। इन झटकों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि इसने न केवल आवासीय इमारतों को मलबे में तब्दील कर दिया, बल्कि देश के बुनियादी ढांचे को भी पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के शुरुआती अनुमानों के अनुसार, इस आपदा में मरने वालों का आंकड़ा 10,000 से लेकर 1,00,000 के बीच हो सकता है। यह आपदा वेनेजुएला के आधुनिक इतिहास की सबसे घातक घटना मानी जा रही है, जिसने पूरे देश को शोक और खौफ में डाल दिया है।

राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने किया आपातकाल का ऐलान
देश की विकट स्थिति को देखते हुए, कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए पूरे देश में आपातकाल (State of Emergency) की घोषणा की है। उन्होंने स्थिति पर नियंत्रण पाने और बचाव कार्यों को गति देने के लिए एक वरिष्ठ जनरल को विशेष अधिकार देकर नियुक्त किया है। अपने संबोधन में उन्होंने भावुक अपील करते हुए देशवासियों से एकता बनाए रखने का आग्रह किया। हालांकि उन्होंने मृतकों की आधिकारिक संख्या का खुलासा नहीं किया, लेकिन उनका लहजा स्थिति की गंभीरता को दर्शाता था। राष्ट्रपति ने यह भी घोषणा की कि बचाव कार्यों के लिए सरकारी मशीनरी को युद्धस्तर पर लगा दिया गया है।

अंतरराष्ट्रीय सहायता का तांता: दुनिया आई वेनेजुएला के साथ
वेनेजुएला के संकट में वैश्विक बिरादरी एकजुट होकर मदद के लिए आगे आई है। अमेरिका ने अपनी ‘सर्च एंड रेस्क्यू’ टीमों के साथ-साथ मेडिकल और मानवीय सहायता सामग्री भेजने का निर्णय लिया है। अल साल्वाडोर के राष्ट्रपति नायब बुकेले ने 50 टन राहत सामग्री और 300 प्रशिक्षित बचावकर्मियों को काराकास भेजने की घोषणा की है। वहीं, इक्वाडोर के राष्ट्रपति डैनियल नोबोआ अज़िन ने तत्काल सहायता भेजने का वादा किया है, और ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा ने भी हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। लैटिन अमेरिका के अन्य देशों ने भी संकट की इस घड़ी में अपने पड़ोसी देश की मदद के लिए हाथ बढ़ाए हैं।
ठप पड़ी सेवाएं: स्कूल, मेट्रो और मुख्य एयरपोर्ट बंद
आपदा के प्रभाव को कम करने और लोगों को सुरक्षित रखने के लिए सरकार ने सार्वजनिक सेवाओं को फिलहाल स्थगित कर दिया है। राजधानी काराकस और अन्य प्रभावित शहरों में ट्रेन और मेट्रो सेवाएं बंद कर दी गई हैं। शैक्षणिक गतिविधियों को रोकने के लिए पूरे देश में स्कूलों को अगले कुछ दिनों के लिए बंद कर दिया गया है। सबसे गंभीर स्थिति माइकेटिया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की है, जिसकी छत का एक बड़ा हिस्सा ढह जाने के कारण उसे परिचालन के लिए बंद कर दिया गया है। यह एयरपोर्ट वेनेजुएला के बाहरी दुनिया से जुड़ने का मुख्य जरिया था, जिसके बंद होने से राहत सामग्री पहुंचाने में भी बड़ी चुनौती पैदा हो गई है।
आफ्टरशॉक्स का सिलसिला और भू-वैज्ञानिक चेतावनी
शुरुआती झटकों के बाद से अब तक 20 से अधिक आफ्टरशॉक्स दर्ज किए गए हैं, जो बचाव कार्यों में बाधा डाल रहे हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के भू-भौतिकीविद वाशन राइट ने चेतावनी दी है कि अगले हफ्ते तक आफ्टरशॉक्स का सिलसिला जारी रह सकता है। डेटा के आधार पर उन्होंने बताया कि 3 से 4 तीव्रता के झटके आने की 99% संभावना है, जबकि 5 तीव्रता वाले आफ्टरशॉक्स की संभावना 90% से अधिक है। हालांकि, 6 या 7 तीव्रता के बड़े झटकों की आशंका फिलहाल कम है, लेकिन बार-बार आती हलचल के कारण पहले से ही क्षतिग्रस्त इमारतों के अचानक गिरने का खतरा बरकरार है।
मलबे में दबे अपनों की तलाश और मानवीय संकट
धरातल पर स्थिति बेहद दयनीय है। मलबे के नीचे दबे लोग मदद के लिए पुकार रहे हैं, जिन्हें सुना जा सकता है। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, लोग घरों से बाहर खुले आसमान के नीचे रातें बिताने को मजबूर हैं क्योंकि वे डरे हुए हैं कि इमारतें गिर सकती हैं। कई क्षेत्रों में बिजली गुल है और संचार के साधन पूरी तरह ठप हो गए हैं। बिजली के खंभे और तार सड़कों पर गिरे पड़े हैं, जिससे बचाव दलों को अंधेरे में राहत कार्य करने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और प्रशासन ने सभी नागरिकों को क्षतिग्रस्त भवनों से दूर रहने की सख्त सलाह दी है।
ब्राजील तक महसूस किए गए झटके, दूतावास की एडवाइजरी
भूकंप की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसका असर लगभग 1,700 किलोमीटर दूर स्थित ब्राजील के अमेजन क्षेत्र तक महसूस किया गया, जहां इमारतों को एहतियातन खाली करना पड़ा। वहीं, काराकास स्थित अमेरिकी दूतावास ने एक एडवाइजरी जारी कर अपने नागरिकों से सुरक्षित स्थान पर रहने और स्थानीय मीडिया के संपर्क में रहने को कहा है। सरकार और राहत दल मलबे में दबे लोगों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं, लेकिन तबाही का दायरा इतना व्यापक है कि पूरी राहत व्यवस्था चरमराई हुई है।











