Ambikapur News : डॉ. संजीवन टोप्पो की गिरफ्तारी की जानकारी समय पर संचालनालय को नहीं भेजे जाने के मामले में अब जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई शुरू हो गई है। संचालनालय पशु चिकित्सा सेवाएं, छत्तीसगढ़ ने सरगुजा के प्रभारी उप संचालक डॉ. आर.पी. शुक्ला को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिनों के भीतर जवाब मांगा है। विभाग का आरोप है कि पुलिस से सूचना मिलने के बावजूद मामले की जानकारी अनावश्यक विलंब से भेजी गई, जिससे निलंबन संबंधी वैधानिक प्रक्रिया प्रभावित हुई।

गिरफ्तारी की सूचना भेजने में देरी पर नोटिस
संचालनालय पशु चिकित्सा सेवाएं द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, विभागीय पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ डॉ. संजीवन टोप्पों के खिलाफ थाना गांधीनगर में अपराध क्रमांक 278/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 और 351(3) में मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने 16 मई 2026 को दोपहर 2 बजे उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया था।

पुलिस ने 21 मई तक कार्यालय को दी थी जानकारी
नोटिस में उल्लेख किया गया है कि थाना गांधीनगर द्वारा 20 मई 2026 को इस संबंध में पत्र जारी किया गया, जो 21 मई 2026 को उप संचालक कार्यालय, सरगुजा में प्राप्त हो गया था। इसके बावजूद संबंधित जानकारी संचालनालय को 5 जून 2026 को भेजी गई, जिसे विभाग ने अनावश्यक विलंब और प्रशासनिक लापरवाही माना है।
निलंबन प्रक्रिया में भी हुई देरी
संचालनालय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 9 के अनुसार यदि कोई शासकीय सेवक 48 घंटे से अधिक समय तक न्यायिक अभिरक्षा में रहता है तो उसके निलंबन की कार्रवाई का प्रावधान है। सूचना देर से भेजे जाने के कारण इस प्रक्रिया के पालन में भी विलंब हुआ।
आचरण नियमों के उल्लंघन का आरोप
नोटिस में डॉ. आर.पी. शुक्ला पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3 के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। विभाग का कहना है कि उनका आचरण कर्तव्यपरायणता और सन्निष्ठा के अपेक्षित मानकों के विपरीत पाया गया, जो लापरवाही और उदासीनता को दर्शाता है।
तीन दिन में मांगा गया स्पष्टीकरण
संचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं ने डॉ. शुक्ला को निर्देश दिया है कि वे दस्तावेजी साक्ष्यों सहित तीन दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें। निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उनके विरुद्ध छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के तहत एकपक्षीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।











