Uric Acid : यूरिक एसिड में कौन सी दाल खाएं, किन दालों से रखें दूरी

Uric Acid : यूरिक एसिड का बढ़ना आज के समय में एक अत्यंत सामान्य स्वास्थ्य समस्या बन गई है। सुनने में यह भले ही कोई गंभीर रोग न लगे, लेकिन शरीर में इसकी अत्यधिक मात्रा हड्डियों और जोड़ों के लिए काल बन जाती है। जब रक्त में यूरिक एसिड का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है, तो यह क्रिस्टल के रूप में एड़ी, टखनों, घुटनों और उंगलियों के जोड़ों में जमा होने लगता है। इसके कारण असहनीय दर्द, सूजन और चलने-फिरने में भारी कठिनाई होती है।

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यूरिक एसिड का निर्माण मुख्य रूप से हमारे द्वारा ग्रहण किए गए आहार, विशेषकर प्यूरीन युक्त प्रोटीन से होता है। इसलिए, इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सही दालों और आहार का चुनाव करना अत्यंत अनिवार्य हो जाता है।

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यूरिक एसिड के मरीजों के लिए कौन सी दालें सुरक्षित हैं?

आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ. चंचल शर्मा के अनुसार, यूरिक एसिड के रोगियों के लिए मूंग की दाल सबसे उत्तम और सुरक्षित विकल्प मानी जाती है। अन्य भारी दालों की तुलना में मूंग की दाल पचने में बहुत हल्की होती है और इसमें प्यूरीन की मात्रा न्यूनतम होती है, जिससे यूरिक एसिड बढ़ने का खतरा कम हो जाता है। हालांकि, इसे पकाने से पहले 1 से 2 घंटे तक भिगोकर रखना आवश्यक है, जिससे इसकी पाचक शक्ति बढ़ जाती है।

मूंग के अलावा लाल मसूर की दाल का सेवन भी सीमित मात्रा में किया जा सकता है, क्योंकि इसमें प्यूरीन की मात्रा मध्यम होती है। सेवन करते समय ध्यान रखें कि दाल पूरी तरह से अच्छी तरह गली हुई हो और उसे हल्का तड़का लगाकर ही खाएं।

किन दालों और आहार से दूरी बनाना है जरूरी?

यूरिक एसिड के स्तर को नियंत्रित रखने के लिए हाई-प्यूरीन वाले आहार से परहेज करना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। मरीजों को चना दाल, अरहर (तुअर) की दाल और मटर की दाल का सेवन करने से बचना चाहिए, क्योंकि ये शरीर में यूरिक एसिड के निर्माण को तेजी से बढ़ा सकती हैं।

इसके अलावा, उच्च प्रोटीन वाली अन्य खाद्य सामग्रियां जैसे कि राजमा, छोले, और काले चने भी दर्द को बढ़ा सकते हैं। प्यूरीन से भरपूर ये खाद्य पदार्थ जोड़ों में यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स के जमाव को तेज करते हैं, जिससे सूजन और दर्द की समस्या गंभीर हो सकती है।

यूरिक एसिड को जड़ से कम करने के असरदार उपाय

यूरिक एसिड को संतुलित करने के लिए केवल दालों से परहेज ही काफी नहीं, बल्कि जीवनशैली में भी बदलाव जरूरी है। भरपूर मात्रा में पानी पीने से शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं। खान-पान में पालक, टमाटर और बीजों वाली सब्जियों का सेवन सीमित करें। ज्यादा मीठे पेय पदार्थ, मिठाई, शराब, तला हुआ भोजन और मांसाहार का सेवन पूरी तरह से बंद या बहुत कम कर देना चाहिए।

इसके स्थान पर क्विनोआ और चावल जैसे हल्के विकल्पों को आहार में शामिल करें, जो पाचन के लिए बेहतर होते हैं। मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त रखने के लिए सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीने की आदत डालें और नियमित रूप से व्यायाम करें। सही आहार और अनुशासन ही यूरिक एसिड को मात देने का एकमात्र रास्ता है।

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Chandan Das

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