राम मंदिर ट्रस्ट से चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। चढ़ावा चोरी प्रकरण में SIT की कार्रवाई के बाद लिया गया यह फैसला क्या केवल शुरुआत है या आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे पूरे मामले की तस्वीर बदल देंगे?
राम मंदिर ट्रस्ट से चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। चढ़ावा चोरी प्रकरण में SIT की कार्रवाई के बाद लिया गया यह फैसला क्या केवल शुरुआत है या आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे पूरे मामले की तस्वीर बदल देंगे?

Champat Rai Resign : अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे के कथित दुरुपयोग और चोरी के मामले ने एक नया मोड़ ले लिया है। ट्रस्ट के दो प्रमुख सदस्यों—महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा-ने नैतिक आधार पर अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब इस मामले को लेकर विपक्ष और विभिन्न संगठनों द्वारा लगातार दबाव बनाया जा रहा था। चंपत राय, जो लंबे समय से राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे, और अनिल मिश्रा ने अपना त्यागपत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास को सौंपा है।

यह घटनाक्रम विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक रिपोर्ट आने के बाद तेजी से विकसित हुआ। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में कुछ अत्यंत गंभीर और महत्वपूर्ण सिफारिशें की थीं, जिसके आधार पर मामले में पहली एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। हालांकि एफआईआर में चंपत राय और अनिल मिश्रा का नाम प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं था, लेकिन विपक्ष और सामाजिक संगठनों द्वारा उनकी भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए, जांच को निष्पक्ष रखने के लिए इन दोनों दिग्गजों का इस्तीफा एक बड़े प्रशासनिक कदम के रूप में देखा जा रहा है।

समाजवादी पार्टी के फैजाबाद सांसद अवधेश प्रसाद ने इस इस्तीफे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘बहुत देर से लिया गया फैसला’ बताया। उन्होंने कहा कि नैतिक जिम्मेदारी तो जांच शुरू होने से पहले ही तय हो जानी चाहिए थी। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए क्योंकि यह करोड़ों भक्तों की आस्था और राष्ट्र का विषय है। वहीं, कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने भी इस कार्रवाई को अपर्याप्त करार दिया है। उनका तर्क है कि केवल चंपत राय के इस्तीफे से मामला सुलझने वाला नहीं है, क्योंकि इसमें और भी कई बड़े नाम शामिल हो सकते हैं। विपक्ष का आरोप है कि अब तक केवल छोटे स्तर के लोगों (छोटी मछलियों) पर कार्रवाई हुई है, जबकि मुख्य सूत्रधार अभी भी सुरक्षित हैं।
विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के अध्यक्ष आलोक कुमार ने भी पहले चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ निष्पक्ष जांच की मांग उठाई थी। उन्होंने स्पष्ट किया था कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है और जांच के दायरे से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए। वीएचपी का यह रुख ट्रस्ट के भीतर मची हलचल का मुख्य कारण बना। अब सबकी नजरें एसआईटी की अगली कार्रवाई पर हैं। सूत्रों के अनुसार, एसआईटी की टीम जल्द ही दोबारा अयोध्या का दौरा कर सकती है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों से मिली जानकारी और डिजिटल डेटा के विश्लेषण के बाद कई नए नाम सामने आए हैं, जिनकी जांच करना अब एजेंसी की प्राथमिकता है। इस पूरे प्रकरण में अब तक 8 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिससे यह साफ है कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला आने वाले दिनों में और अधिक तूल पकड़ेगा।
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