Ram Mandir : अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक जांच ने मंदिर प्रबंधन की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एसआईटी ने 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच के सीसीटीवी फुटेज और दस्तावेजों की गहन जांच की, जिसमें एक बेहद हैरान करने वाली जानकारी सामने आई है। जांच के अनुसार, महज 42 दिनों की इस छोटी सी अवधि में 70 बार चढ़ावे की चोरी और गबन की घटनाएं हुई हैं। यह सिलसिला तब सामने आया जब एसआईटी ने मंदिर के भेंट और चढ़ावा गणना कक्ष (काउटिंग रूम) की कार्यप्रणाली का बारीकी से विश्लेषण किया। इस दौरान टीम को चोरी से संबंधित ठोस सबूत मिले हैं, जिसके आधार पर अब सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

व्यवस्था में खामियां और आंतरिक नियंत्रण की विफलता
एसआईटी की जांच में केवल चोरी ही नहीं, बल्कि मंदिर ट्रस्ट की वित्तीय प्रबंधन प्रणाली में भी बड़ी खामियां उजागर हुई हैं। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि दान और चढ़ावे की सामग्री के प्रबंधन और नगदी की गिनती के लिए कोई भी मजबूत आंतरिक नियंत्रण प्रणाली मौजूद नहीं थी। पर्यवेक्षणीय स्तर पर जवाबदेही तय करने में घोर अस्पष्टता पाई गई, जिससे धांधली करना आसान हो गया। जांच दल ने पिछले तीन वर्षों—वित्तीय वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25—की आंतरिक ऑडिट रिपोर्टों को भी खंगाला है। इन रिपोर्टों में हुंडियों की संख्या और आधिकारिक रिकॉर्ड में भारी अंतर पाया गया। इसके अलावा, सुरक्षा प्रोटोकॉल केवल कागजों तक ही सीमित थे और सीसीटीवी कवरेज का स्तर भी अपर्याप्त था।

बड़े अधिकारियों का इस्तीफा और आठ आरोपियों की गिरफ्तारी
इस घोटाले के सामने आने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट के भीतर खलबली मच गई है। नैतिक आधार पर जिम्मेदारी लेते हुए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 8 लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत नामजद एफआईआर दर्ज की है। इन आरोपियों में रामशंकर यादव (उर्फ टिन्नू यादव), अनुकल्प मिश्र, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्र, रमाशंकर मिश्र, सुभाष श्रीवास्तव और मनीष यादव शामिल हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी रामशंकर यादव को चंपत राय का करीबी बताया जा रहा है। पुलिस ने इन सभी 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और अब उनसे कड़ी पूछताछ की जा रही है।
भविष्य की कार्रवाई और जांच का दायरा
हालांकि सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में इस मामले को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे थे, लेकिन एसआईटी ने उनमें से कई तथ्यों को बेबुनियाद बताया है। एसआईटी का स्पष्ट मानना है कि कार्रवाई केवल पुख्ता सबूतों के आधार पर की गई है। फिलहाल, टीम गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी और जब्त किए गए डिजिटल डेटा का विश्लेषण कर रही है। एसआईटी की जांच का दायरा अभी और बढ़ सकता है, क्योंकि शुरुआती जांच में मिली विसंगतियों ने पूरे चढ़ावा प्रबंधन तंत्र को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। यह मामला न केवल मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में सुधार की आवश्यकता को दर्शाता है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं के भरोसे को बनाए रखने के लिए एक पारदर्शी जांच की अहमियत को भी रेखांकित करता है।
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